पाकिस्तान को सऊदी अरब से बड़ा झटका, रक्षा सौदा हुआ रद्द
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर सऊदी अरब का प्रभाव
पाकिस्तान, जो आर्थिक संकट के कगार पर है, को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। सऊदी अरब, जिसे पाकिस्तान अपना सबसे बड़ा सहयोगी मानता है, ने उसे एक बड़ा झटका दिया है। दरअसल, पाकिस्तान सूडान के साथ 1.5 बिलियन डॉलर का एक महत्वपूर्ण रक्षा सौदा करने वाला था, जिसमें वह सूडान को अपने फाइटर जेट्स और अन्य हथियार बेचने की योजना बना रहा था। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि इस सौदे से उसकी कमजोर होती अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और उसकी सैन्य ताकत का प्रचार होगा। लेकिन इस सौदे के लिए फंडिंग सऊदी अरब द्वारा की जानी थी। सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब ने इस डील के लिए फंडिंग देने से मना कर दिया और पाकिस्तान को स्पष्ट निर्देश दिया कि इस समझौते को तुरंत समाप्त कर दिया जाए। सऊदी अरब के इस निर्णय ने पाकिस्तान को गहरा झटका दिया है।
सऊदी अरब के इस यू-टर्न के पीछे दो मुख्य कारण माने जा रहे हैं। पहला, पश्चिमी देशों का दबाव, जिसमें अमेरिका और कई यूरोपीय देशों ने रियाद को सलाह दी है कि वह अफ्रीका के प्रॉक्सिमिटी वॉर से दूर रहे। दूसरा, सऊदी अरब की रणनीति में बदलाव है। सूडान में सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच चल रहे भीषण गृह युद्ध के कारण, सऊदी अरब इस खूनी संघर्ष में हथियारों की सप्लाई का हिस्सा नहीं बनना चाहता।
पाकिस्तान के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि पिछले साल भारत के साथ हुई झड़प के बाद, उसने अपने हथियारों का जमकर प्रचार किया था। उसे उम्मीद थी कि सूडान के साथ यह डील उसके लिए गेम चेंजर साबित होगी। लेकिन जैसे ही सऊदी अरब ने अपनी स्थिति स्पष्ट की, पाकिस्तान को बिना किसी विकल्प के इस डील से पीछे हटना पड़ा। इसके अलावा, पाकिस्तान की एक और $4 बिलियन की डील लीबिया के साथ भी खतरे में पड़ गई है, क्योंकि सऊदी अरब वहां भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रहा है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान की स्थिति ऐसी है कि सऊदी अरब के बिना उसकी आर्थिक स्थिति को संभालना मुश्किल है।