पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर भारत के खिलाफ यूएन में उठाई आवाज
पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दरवाजा खटखटाया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह एक बूंद भी पानी नहीं छोड़ेगा। इस लेख में जानें कि पाकिस्तान ने क्या कदम उठाए हैं और भारत का क्या जवाब है।
Jun 20, 2026, 14:01 IST
पाकिस्तान की चिंताएँ और भारत का जवाब
पाकिस्तान ने वैश्विक मंच पर अपनी आवाज उठाई है, जबकि भारत ने उसे स्पष्ट संदेश दिया है। सिंधु जल संधि के मुद्दे पर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दरवाजा खटखटाया है। भारत के सख्त रुख ने पाकिस्तान को परेशान कर दिया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ईशाक डार ने भारत के खिलाफ सुरक्षा परिषद से कार्रवाई की मांग की है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह एक बूंद भी पानी नहीं छोड़ेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जो पानी पाकिस्तान को जाता है, उसका उपयोग भारत के नागरिकों के लिए किया जाएगा।
पाकिस्तान का पत्र और सुरक्षा परिषद की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तखार अहमद ने बताया कि उन्होंने ईशाक डार का पत्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष लियोनूर जालावाटा टोरेस को सौंपा है। इस पत्र में भारत द्वारा चिनाब नदी से संबंधित दो परियोजनाओं पर पाकिस्तान की चिंताओं को उजागर किया गया है। इफ्तखार ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि इस पत्र के माध्यम से सुरक्षा परिषद का ध्यान इस महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर आकर्षित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण एशिया की वर्तमान स्थिति पर यूएनएससी अध्यक्ष को जानकारी दी गई है।
सिंधु जल संधि का इतिहास और पाकिस्तान की धमकियाँ
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे को नियंत्रित करती है। भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस संधि को निलंबित कर दिया था। पाकिस्तान समय-समय पर भारत को धमकी देता रहा है कि यदि उसे पानी नहीं मिला, तो वह भारत में तबाही मचाएगा। हालांकि, यह केवल पाकिस्तान के सपने हैं, क्योंकि उसके आर्थिक हालात इतने खराब हैं कि वह वास्तविकता में ऐसा नहीं कर सकता।