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पाकिस्तान में न्यायिक नियुक्तियों का गतिरोध समाप्त, राष्ट्रपति ने 19 जजों की मंजूरी दी

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने पांच उच्च न्यायालयों में 19 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी है, जिससे न्यायिक नियुक्तियों में चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। यह निर्णय राष्ट्रपति कार्यालय और संघीय सरकार के बीच विवाद को खत्म करता है। पिछले महीने ज्यूडिशियल कमीशन द्वारा 24 नामों की सिफारिश की गई थी, जिसे प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने मंजूरी के लिए भेजा था। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में और अधिक जानकारी।
 

पाकिस्तान में न्यायिक नियुक्तियों की मंजूरी

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने मंगलवार को पांच उच्च न्यायालयों में 19 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को स्वीकृति दी। इसके साथ ही, पांच अन्य जजों को स्थायी रूप से नियुक्त किया गया। यह निर्णय राष्ट्रपति कार्यालय और संघीय सरकार के बीच चल रहे विवाद को समाप्त करता है। पिछले महीने, पाकिस्तान के ज्यूडिशियल कमीशन ने उच्च न्यायपालिका में नियुक्ति के लिए 24 नामों की सिफारिश की थी, जिसे प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने ज़रदारी को मंजूरी के लिए भेजा था। यह मामला कई हफ्तों तक लम्बित रहा और हाल ही में इस देरी को इस्लामाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।


जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया

राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, लाहौर हाई कोर्ट (LHC), सिंध हाई कोर्ट (SHC), पेशावर हाई कोर्ट (PHC), इस्लामाबाद हाई कोर्ट (IHC) और बलूचिस्तान हाई कोर्ट (BHC) में अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई है। इसमें LHC के लिए 10 अतिरिक्त जज और IHC, SHC तथा BHC के लिए तीन-तीन अतिरिक्त जज शामिल हैं। PHC के चार अतिरिक्त जजों और LHC के एक अतिरिक्त जज को स्थायी जज के रूप में नियुक्त किया गया है। यह मंजूरी तब रुकी हुई थी जब ज़रदारी की कानूनी टीम ने बताया कि पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) द्वारा सुझाए गए अधिकांश नामों को ज्यूडिशियल कमीशन ने खारिज कर दिया था।


शपथ ग्रहण समारोह की देरी

पहले, जजों के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख 27 जुलाई निर्धारित की गई थी, लेकिन ज़र्दारी ने न तो उस प्रस्ताव को मंजूरी दी और न ही उसे पुनर्विचार के लिए वापस भेजा, जिसके कारण इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया। इस देरी ने राष्ट्रपति कार्यालय और सरकार के बीच विवाद उत्पन्न कर दिया था। सरकार की कानूनी टीम का तर्क था कि संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार, राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करना चाहिए। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री शरीफ़ और उनके भाई नवाज़ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) और PPP के बीच मतभेदों के बीच सामने आया है। हालाँकि, इस ताज़ा कदम से न्यायिक नियुक्तियों में उत्पन्न गतिरोध समाप्त हो गया है।