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पाकिस्तान में लश्कर के आतंकियों की शहबाज शरीफ को धमकी, इजरायल को मान्यता देने पर चेतावनी

पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी ने इजरायल को मान्यता देने की कोशिश पर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाले को समाप्त कर दिया जाएगा। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील की है। जानिए इस विवाद के पीछे की राजनीति और पाकिस्तान की कठिन स्थिति के बारे में।
 

लश्कर के उप प्रमुख की धमकी

पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी अब अपने नेताओं शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को खुली धमकियां देने लगे हैं। लश्कर के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी ने इजरायल को मान्यता देने की किसी भी कोशिश पर पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। एक सार्वजनिक रैली में उन्होंने कहा कि यदि किसी ने इजरायल को स्वीकार करने का विचार किया, तो उसे समाप्त कर दिया जाएगा। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते के तहत इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील की है。


कट्टरपंथी रुख और सुरक्षा विशेषज्ञों की राय

ईद उल अजहा की नमाज के बाद आयोजित रैली में कसूरी ने पाकिस्तान की विदेश नीति में किसी भी संभावित बदलाव के खिलाफ कट्टरपंथी रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कोई भी वैश्विक शक्ति इस्लामी देशों को इजरायल को मान्यता देने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। कसूरी ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पाकिस्तान की सैन्य क्षमता अब इजरायली प्रभाव का मुकाबला करने में सक्षम है। अपने भाषण में उन्होंने जिहाद, शहादत और फिलिस्तीन संघर्ष जैसे संवेदनशील मुद्दों का उपयोग कर समर्थकों को भड़काने का प्रयास किया।


अमेरिकी राष्ट्रपति की अपील और पाकिस्तान की स्थिति

हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कसूरी की यह बयानबाजी एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हो सकती है। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अमेरिका के दबाव से बचने के लिए इस तरह की कट्टर प्रतिक्रिया को सामने आने दे रहे हैं ताकि यह संदेश दिया जा सके कि पाकिस्तान में इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का जबरदस्त विरोध है।


अब्राहम समझौते का संदर्भ

यह विवाद तब और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए संभावित समझौते के हिस्से के रूप में पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और अन्य मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की। ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका ने क्षेत्र में जटिल हालात को संभालने के लिए काफी प्रयास किए हैं और अब यह आवश्यक है कि संबंधित देश कम से कम अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें।


पाकिस्तान की कठिन स्थिति

पाकिस्तान इस समय एक कठिन स्थिति में फंसता दिखाई दे रहा है। एक ओर वह अमेरिका और ट्रंप प्रशासन के साथ करीबी संबंधों का लाभ उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर घरेलू राजनीति, धार्मिक संगठनों और फिलिस्तीन के समर्थन की पुरानी नीति के कारण इजरायल को मान्यता देना उसके लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है।


विश्लेषकों की राय

विश्लेषकों का कहना है कि अब्राहम समझौते में शामिल होने से पाकिस्तान को कुछ कूटनीतिक और आर्थिक लाभ मिल सकते हैं, लेकिन इसके गंभीर जोखिम भी हैं। ऐसा कदम पाकिस्तान की फिलिस्तीन समर्थक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, ईरान के साथ तनाव बढ़ा सकता है और देश के भीतर अस्थिरता पैदा कर सकता है।