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पीएम मोदी का नॉर्वे दौरा: भारत-नॉर्वे संबंधों में नया मोड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नॉर्वे दौरा 43 वर्षों बाद हो रहा है, जो भारत-नॉर्वे संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। इस यात्रा के दौरान, पीएम मोदी नॉर्वे के राजा और प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे और व्यापार तथा अनुसंधान पर चर्चा करेंगे। भारतीय राजदूत ने इस यात्रा को वैश्विक परिवर्तनों के बीच एक महत्वपूर्ण अवसर बताया है। जानें इस दौरे के महत्व और संभावित अवसरों के बारे में।
 

43 वर्षों बाद पीएम मोदी का नॉर्वे दौरा


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नॉर्वे दौरा 15 मई को यूएई यात्रा से शुरू हुआ था। कल, पीएम मोदी नॉर्वे पहुंचेंगे, जो उनकी पहली यात्रा है। यह यात्रा 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा है।


नॉर्वे में भारतीय राजदूत का बयान


भारत की राजदूत ग्लोरिया गैंगटे ने कहा कि यह यात्रा वैश्विक परिवर्तनों और भारत-नॉर्वे संबंधों में आए बदलावों के बीच हो रही है। यह यात्रा संबंधों का मूल्यांकन करने और भारत-ईएफटीए-टीईपीए समझौते द्वारा प्रदान किए गए नए अवसरों की खोज का एक महत्वपूर्ण अवसर है।


टीईपीए समझौते में निवेश का प्रावधान है, जिसमें ईएफटीए देशों द्वारा 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख नौकरियों के सृजन की बात की गई है। कई नॉर्वेजियन कंपनियां इस अवसर का लाभ उठाना चाहेंगी।


पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा का कार्यक्रम


प्रधानमंत्री मोदी 18-19 मई 2026 को तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठकों के लिए नॉर्वे की यात्रा करेंगे। इस दौरान, वे राजा हेराल्ड पंचम और रानी सोन्या से मिलेंगे और प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।