पीओके और गिलगिट बाल्तिस्तान: भारत के लिए खोया हुआ खजाना
पीओके का महत्व और भारत की चूक
पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर, जिसे पीओके के नाम से जाना जाता है, एक ऐसा क्षेत्र है जो अगर भारत के पास होता, तो आज की दुनिया की तस्वीर कुछ और होती। यह वास्तव में दुखद है कि 1947 में भारत सरकार ने इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को अपने हाथों से खो दिया। हम जिस क्षेत्र की चर्चा कर रहे हैं, वह गिलगिट बाल्तिस्तान और उससे जुड़ा वखान कॉरिडोर है। गिलगिट बाल्तिस्तान पीओके का हिस्सा है और यह वखान कॉरिडोर भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र लद्दाख से केवल 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन भारत की चूक के कारण यह पाकिस्तान के नियंत्रण में है। वर्तमान में, पाकिस्तान की सरकार पीओके और गिलगिट बाल्तिस्तान में अवैध चुनाव कराने की योजना बना रही है।
भारत की प्रतिक्रिया और वखान कॉरिडोर का महत्व
भारत ने इस कदम की कड़ी निंदा की है और पाकिस्तान से इस क्षेत्र को तुरंत खाली करने की मांग की है। यदि भारत के पास पीओके और गिलगिट बाल्तिस्तान होता, तो वखान कॉरिडोर भारत की किस्मत को बदल सकता था। भारत और अफगानिस्तान के बीच आधिकारिक सीमा है, और वखान कॉरिडोर भी इसी सीमा से जुड़ा है। भारत का गिलगिट बाल्तिस्तान क्षेत्र वखान कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है, जो भारत के आधिकारिक मानचित्र में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। हालांकि, यह क्षेत्र वर्तमान में पाकिस्तान के कब्जे में है। यदि यह क्षेत्र भारत के पास होता, तो यह एक बड़ा कूटनीतिक लाभ होता। वखान कॉरिडोर लगभग 300 से 350 किलोमीटर लंबा है, जिसकी चौड़ाई 10 से 65 किलोमीटर तक भिन्न होती है।
वखान कॉरिडोर और भारत का व्यापार
वखान कॉरिडोर के उत्तर में तजाकिस्तान है, जबकि पूर्व में इसका 92 किलोमीटर लंबा सीमा चीन से जुड़ता है। दक्षिण में यह पाकिस्तान और पीओके के गिलगिट बाल्तिस्तान से मिलता है। यदि यह क्षेत्र भारत के पास होता, तो भारत सेंट्रल एशिया का एक प्रमुख केंद्र बन जाता। वर्तमान में, सेंट्रल एशिया तक पहुंचने के लिए भारत को ईरान का चक्कर लगाना पड़ता है। लेकिन यदि हमारी सीमा सीधे अफगानिस्तान से जुड़ी होती, तो भारत का व्यापार तेजी से बढ़ता। यदि भारत का सीधा संपर्क वखान कॉरिडोर तक होता, तो भारतीय उत्पाद सीधे रूस तक पहुंच सकते थे। इसके अलावा, तापी गैस पाइपलाइन, जो तुर्कमेनिस्तान से शुरू होकर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और फिर भारत तक जाती है, का भी बड़ा लाभ होता।