पुणे में कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की जांच में नए मोड़
केतन अग्रवाल की हत्या का मामला
पुणे के व्यवसायी केतन अग्रवाल की मृत्यु से संबंधित मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। पुलिस इसे सुनियोजित हत्या का मामला मानते हुए अपनी जांच को आगे बढ़ा रही है। वहीं, आरोपी चेतन चौधरी की ओर से भी कानूनी दलीलें पेश की जा रही हैं। चेतन के वकील का कहना है कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस और प्रत्यक्ष आरोप नहीं हैं।
बचाव पक्ष के सवाल
चेतन चौधरी के वकील राम शाहाणे ने कहा कि FIR में उनके मुवक्किल की भूमिका स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि दस्तावेजों में चेतन का नाम मुख्य रूप से सिया गोयल के करीबी के रूप में आया है। बचाव पक्ष का तर्क है कि केवल व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर किसी को अपराध से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और कई तथ्यों की पुष्टि होना बाकी है।
पुलिस जांच में महत्वपूर्ण तथ्य
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो चेतन चौधरी की भूमिका को संदिग्ध बनाते हैं। अधिकारियों के अनुसार, 18 जून को जब केतन अग्रवाल और सिया गोयल लोनावला के लोहागढ़ किले पहुंचे, तब चेतन पहले से ही वहां मौजूद था। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें एक व्यक्ति को असामान्य कपड़ों में देखा गया। यह सुराग आगे की जांच में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच
जांच एजेंसियों का कहना है कि घटनास्थल के आसपास के डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी जानकारियां मामले को समझने में मदद कर रही हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ गतिविधियां सामान्य से भिन्न थीं, जिससे अधिकारियों का संदेह बढ़ा। इसी आधार पर दोनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की गई।
आरोपियों की पुलिस हिरासत
सिया गोयल और चेतन चौधरी को अदालत ने सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस दौरान जांच एजेंसियां दोनों से पूछताछ कर रही हैं ताकि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा जा सके। पुलिस का कहना है कि कई पहलुओं की जांच अभी भी जारी है और नए तथ्य सामने आ सकते हैं। वहीं, बचाव पक्ष का दावा है कि चेतन के खिलाफ आरोप पर्याप्त नहीं हैं। आने वाले दिनों में जांच और कानूनी प्रक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी।