पुतिन का भारत दौरा: क्या है इसके पीछे की रणनीति और महत्व?
रूस-भारत संबंधों की नई दिशा
रूस-भारत संबंध: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल दिसंबर में भारत की यात्रा करेंगे, जिसकी पुष्टि क्रेमलिन ने की है। यह यात्रा उस समय हो रही है जब वैश्विक राजनीति में भारत की स्थिति तेजी से बदल रही है और रूस के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी और भी मजबूत हो रही है।
मोदी की सक्रियता के बीच पुतिन का दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्तमान में जापान में हैं और 31 अगस्त को चीन जाने की योजना बना रहे हैं। इस बीच पुतिन के भारत दौरे की घोषणा, दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को दर्शाती है। यह दौरा भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा दे सकता है।
अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ का प्रभाव
हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत सेकेंडरी टैरिफ लागू किया है। यह निर्णय भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने के संदर्भ में लिया गया है। अब भारत पर कुल 50% तक का टैरिफ लग चुका है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में तनाव बढ़ने की आशंका है।
भारत की स्पष्ट प्रतिक्रिया
भारत ने रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी प्रतिक्रिया को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। भारत का कहना है कि उसने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा है कि वे किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे, चाहे यह निर्णय कितना भी महंगा क्यों न हो।
भारत-रूस संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और रूस के रिश्ते सोवियत संघ के समय से ही मजबूत रहे हैं। रूस भारत का एक प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता रहा है और ऊर्जा के क्षेत्र में भी वह भारत को बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति करता है। यूक्रेन युद्ध के बाद, जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तब रूस ने भारत और चीन को अपने प्रमुख ग्राहक बना लिया। इससे रूस को आर्थिक राहत मिली और भारत को सस्ता ऊर्जा स्रोत।
पुतिन की विदेश यात्राओं की सीमाएं
यूक्रेन युद्ध के बाद, पुतिन ने अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्राएं सीमित कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है, लेकिन भारत ICC का सदस्य नहीं है। इसलिए पुतिन को यहां किसी कानूनी बाध्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा।
भारत दौरे का राजनीतिक महत्व
पुतिन का भारत दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की गैर-पश्चिमी रणनीति को मजबूती प्रदान करता है। भारत न तो पश्चिमी दबाव में आया है और न ही उसने रूस से दूरी बनाई है। यह दौरा भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का एक उदाहरण बन सकता है और भारत-रूस संबंधों को नई ऊर्जा दे सकता है।