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पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में कदम रखा, 'जननीति भारत' पार्टी की स्थापना की

पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में कदम रखा है और अपनी नई पार्टी 'जननीति भारत' की स्थापना की है। उन्होंने आगामी चुनावों में भाग लेने की घोषणा की और पार्टी के तीन मुख्य संकल्पों का उल्लेख किया। दिव्या ने बताया कि उनकी पार्टी का उद्देश्य जनता की वास्तविक आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना है। उन्होंने अपने जनसमर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि वे आम जनता की आवाज को सुनने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जानें उनके प्रशासनिक करियर और राजनीतिक भविष्य के बारे में।
 

दिव्या मित्तल का राजनीतिक सफर शुरू

लखनऊ: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से इस्तीफा देकर जनसेवा की दिशा में कदम बढ़ाने वाली पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने अब राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लाइव सत्र के दौरान आगामी चुनावों में भाग लेने की घोषणा की और अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'जननीति भारत' की स्थापना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पारंपरिक राजनीति हमेशा जनता पर हावी रही है, लेकिन उनका नया दल जनता के राज की स्थापना के लिए समर्पित है।


पार्टी के मुख्य संकल्प और जन-केंद्रित नीतियां

जन-केंद्रित नीतियां और पार्टी के तीन मुख्य संकल्प
दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी की कार्यप्रणाली को स्पष्ट करते हुए तीन प्रमुख संकल्प प्रस्तुत किए हैं। पहला संकल्प है 'जन से नीति और नीति से भारत', दूसरा संकल्प हर निर्णय को आवश्यकता के अनुसार लेना है, और तीसरा संकल्प है निर्णयों में समानता सुनिश्चित करना। उन्होंने यह भी बताया कि देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया में आम नागरिकों की वास्तविक आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। किसानों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं का समाधान उनके अनुभवों और सुझावों के आधार पर किया जाएगा। इसके अलावा, विकास कार्यों में जाति, धर्म या पहचान के बजाय लोगों की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा और स्थानीय विकास योजनाओं में जनता की भागीदारी पर भी जोर दिया गया है।


जनता का अभूतपूर्व समर्थन

‘उम्मीद का दीया लेकर निकली थी, जनता ने सूरज बना दिया’
दिव्या मित्तल ने अपने लाइव वीडियो संदेश में बताया कि राजनीति में आने की इच्छा व्यक्त करने के बाद उन्होंने जनता से संपर्क के लिए एक फोन नंबर जारी किया था। उस नंबर पर इतनी बड़ी संख्या में संदेश आए कि व्हाट्सएप ने उसे अस्थायी रूप से रोक दिया। उन्होंने जनसमर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह उम्मीद का एक छोटा सा दीया लेकर निकली थीं, लेकिन जनता के समर्थन ने उन्हें सूरज के सामने खड़े होने जैसा साहस दिया है। उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक दलों की कमी नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि आम जनता की आवाज नहीं सुनी जाती। गंगा नदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 'जननीति भारत' का संचालन समानता के सिद्धांत पर होगा।


राजनीतिक प्रस्तावों की चर्चा

राजा भैया की पार्टी और सपा के ऑफर की भी रही थी सियासी चर्चा
दिव्या मित्तल के प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही थीं। राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि रघुराज प्रताप सिंह उर्फ 'राजा भैया' की पार्टी 'जनसत्ता दल' ने उन्हें अपने साथ जुड़ने का प्रस्ताव दिया था। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उन्हें सपा में शामिल होने का खुला ऑफर दिया था। हालांकि, सभी अटकलों को समाप्त करते हुए दिव्या मित्तल ने मौजूदा दल में शामिल होने के बजाय अपनी स्वतंत्र पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया।


प्रशासनिक करियर का अनुभव

13 साल के प्रशासनिक करियर में मिर्जापुर और देवरिया में रहीं चर्चित DM
दिव्या मित्तल ने लगभग 13 वर्षों तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्य किया और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर राजनीति में आने का निर्णय लिया। वे उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और देवरिया जैसे प्रमुख जिलों में जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत रहीं। अपने कार्यकाल के दौरान उनकी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली और त्वरित जनसुनवाई के लिए उन्हें जाना जाता था। हालांकि, मिर्जापुर में उनके कार्यकाल के दौरान विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर स्थानीय नेताओं के साथ टकराव की खबरें भी सुर्खियों में रहीं।