पेशावर उच्च न्यायालय में पीटीआई नेताओं की हिरासत पर सुनवाई
पेशावर उच्च न्यायालय में याचिकाओं की सुनवाई
पेशावर, 3 नवंबर: पेशावर उच्च न्यायालय ने खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी सहित पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के तीन नेताओं की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिकाओं को एक बड़ी पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया है। अफरीदी और पीटीआई के अन्य दो नेता, बाबर सलीम स्वाति और जुनैद अकबर, 11 अक्टूबर को राज्यपाल शासन और आपातकाल लागू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सैयद अरशद अली और न्यायमूर्ति मुहम्मद फहीम वली की दो सदस्यीय पीठ ने की।
इस दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने तर्क दिया कि अफरीदी और स्वाति कई दिनों से लापता हैं और उनकी स्थिति का कोई पता नहीं चल पाया है। अधिवक्ता बशीर खान वजीर ने बताया कि खैबर पख्तूनख्वा के राज्यपाल और प्रांतीय सलाहकारों ने पुष्टि की है कि इन नेताओं को एहतियातन हिरासत में रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह से लोगों को हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
महाधिवक्ता सनाउल्लाह ने अदालत से संबंधित रिपोर्ट पेश करने के लिए और समय मांगा। उन्होंने कहा कि लोक व्यवस्था बनाए रखने के कानून (एमपीओ) के तहत 200 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। न्यायमूर्ति अली ने महाधिवक्ता को याद दिलाया कि अदालत पहले ही 10 दिन की समय-सीमा दे चुकी थी, लेकिन उसके आदेशों का पालन नहीं किया गया।
महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और गृह विभाग से रिपोर्ट मांगी गई हैं। उन्होंने रिपोर्ट पेश करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत के निर्देशों का पालन न किए जाने पर चिंता व्यक्त की। अधिवक्ता यासिर खट्टक ने कहा कि अदालत ने आदेश जारी किए थे, लेकिन उन पर अमल नहीं किया जा रहा है।
खैबर पख्तूनख्वा बार काउंसिल के सदस्य अधिवक्ता फारूक अहमद खट्टक ने भी अदालत से जानकारी मांगी कि क्या संबंधित नेताओं को एमपीओ की धारा-3 के तहत हिरासत में लिया गया है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने प्रांतीय विधानसभा के उपाध्यक्ष के आवास की सील हटाने के अदालत के आदेश का पालन न किए जाने का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी अदालत की अवमानना कर रहे हैं।
न्यायमूर्ति अली ने सुझाव दिया कि इन मामलों को बड़ी पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा जाए। महाधिवक्ता ने भी बड़ी पीठ के गठन का अनुरोध किया। इसके बाद उच्च न्यायालय ने संबंधित मामलों को बड़ी पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेजने का निर्णय लिया। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद-232 के तहत खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल की घोषणा की और अनुच्छेद-234 के तहत राज्यपाल शासन लागू किया, जिससे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का शासन समाप्त हो गया। यह कदम संघीय सरकार और पीटीआई के नेतृत्व वाले प्रांतीय प्रशासन के बीच आतंकवाद-रोधी नीति को लेकर बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया था।