×

प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की SCO शिखर सम्मेलन में महत्वपूर्ण बातचीत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बिश्केक में आयोजित 26वें SCO शिखर सम्मेलन में महत्वपूर्ण बातचीत की। पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंडों की निंदा की और शांति की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने युद्ध के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता दी, जबकि रूस-यूक्रेन संघर्ष के प्रभावों पर भी चर्चा की। इस सम्मेलन में भारत की भूमिका और वैश्विक स्थिति पर मोदी का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है।
 

SCO शिखर सम्मेलन में नेताओं की मुलाकात

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और थोड़ी देर बातचीत की। अन्य नेताओं के साथ समूह फोटो के बाद, दोनों नेताओं के बीच यह संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर जब भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा, जिसमें शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना है।


PM मोदी का आतंकवाद पर स्पष्ट संदेश

आज SCO शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंडों की निंदा की। उन्होंने अपने पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ की उपस्थिति में कहा कि हमें आतंकवाद के सभी पहलुओं - जैसे कि इसकी फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करना होगा। इसके साथ ही, उन्होंने युद्ध के बजाय कूटनीति पर जोर दिया, यह कहते हुए कि "युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकलता है और सभी संघर्षों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।"


रूसी राष्ट्रपति के साथ बातचीत

SCO समिट के दौरान, पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमने यूक्रेन के मुद्दे पर लगातार बातचीत की है। भारत शांति के प्रयासों का समर्थन करता है और आगे भी करेगा। उन्होंने कहा कि युद्ध में बिताया गया हर दिन मानवता को पीछे ले जाता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम नई उम्मीद और उत्साह लाता है।


वैश्विक स्थिति पर भारत का दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी उस समय आई है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष का वैश्विक संबंधों, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। भारत ने हमेशा संघर्षों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति का समर्थन किया है। मोदी और पुतिन की बैठक ईरान पर चल रहे अमेरिका-इजरायल युद्ध के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, जिसने मध्य पूर्व से ऊर्जा की आपूर्ति में बाधा डाली है। SCO की स्थापना 2001 में हुई थी, जिसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल थे। भारत और पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने, जबकि ईरान 2023 और बेलारूस 2024 में शामिल होंगे।