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प्रधानमंत्री मोदी का आतंकवाद पर सख्त संदेश, एससीओ में की महत्वपूर्ण बातें

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए गंभीर चुनौती है और इसके खिलाफ केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मोदी ने वैश्विक संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति से करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पश्चिम एशिया के संकट और चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर भी अपने विचार साझा किए। एससीओ के 25 वर्ष पूरे होने पर हुई प्रगति की समीक्षा की गई और भविष्य के लिए रोडमैप तैयार करने की बात की गई।
 

प्रधानमंत्री मोदी का आतंकवाद के खिलाफ आह्वान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में आतंकवाद को सरकारी नीति के रूप में अपनाने वाले देशों के खिलाफ एकजुटता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संघर्षों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। इस अवसर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और अन्य वैश्विक नेताओं की उपस्थिति में मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में केवल प्रतिक्रिया तक सीमित न रहने की आवश्यकता पर जोर दिया।


मोदी ने एससीओ के भीतर निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल देते हुए आतंकवादी नेटवर्क, उनके वित्तपोषण, भर्ती के तरीकों और पनाहगाहों को समाप्त करने की बात की। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश आतंकवाद का उपयोग नीति के रूप में करते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि आतंकवाद कभी भी किसी के लिए लाभकारी नहीं हो सकता।


पश्चिम एशिया के संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए, मोदी ने कहा कि भारत हमेशा से यह मानता रहा है कि सभी तनावों का समाधान युद्ध के बजाय संवाद और कूटनीति से होना चाहिए। उन्होंने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के संदर्भ में कहा कि कनेक्टिविटी परियोजनाओं को सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।


आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की आवश्यकता

मोदी ने कहा, "आतंकवाद मानवता के लिए एक गंभीर चुनौती है। हमें आतंकवाद के वित्तपोषण, कट्टरपंथ और आतंकियों के पनाहगाहों के खिलाफ एकजुट होकर काम करना होगा।" उन्होंने यह भी कहा कि हमें उन देशों को कड़ा संदेश देना चाहिए जो आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में अपनाते हैं।


उन्होंने पश्चिम एशिया के संकट पर चर्चा करते हुए कहा कि एक क्षेत्र का संघर्ष केवल उसी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है। मोदी ने कहा कि आज की आपस में जुड़ी हुई दुनिया में सुरक्षा का दायरा और भी बढ़ गया है।


उन्होंने कहा, "भारत लगातार यह कहता रहा है कि सभी तनावों का समाधान युद्ध के बजाय बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।" प्रधानमंत्री ने यूरेशिया में शांति और स्थिरता के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि भारत अफगानिस्तान के विकास में योगदान देता रहेगा।


संपर्क व्यवस्था और सहयोग पर जोर

मोदी ने संपर्क व्यवस्था सुधारने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत व्यापार को बढ़ावा देने और विकास के नए रास्ते खोलने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि ऐसे प्रयास सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करें।


प्रधानमंत्री ने एससीओ के लिए अपने दृष्टिकोण के तीन मुख्य स्तंभ - सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर - पर आधारित बातें की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इन विचारों को ठोस परिणामों में बदला जाए।


उन्होंने कहा, "हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारे लोगों के बीच संबंध हैं। एससीओ के अगले 25 वर्षों में लोगों के बीच संबंध हमारे सहयोग का केंद्रबिंदु रहना चाहिए।"


एससीओ शिखर सम्मेलन की उपलब्धियाँ

एससीओ शिखर सम्मेलन में संगठन के 25 वर्ष पूरे होने पर प्रगति की समीक्षा की गई और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि के लिए इसके योगदान पर चर्चा की गई। मोदी ने कहा कि यह वर्षगांठ अगले 25 वर्षों के लिए रोडमैप तैयार करने का उचित अवसर है।


शिखर सम्मेलन में चार सहमति पत्रों और 20 से अधिक फैसलों को मंजूरी दी गई, जिनमें जलवायु, परमाणु सुरक्षा, ऊर्जा संरक्षण और नशीली दवाओं की रोकथाम जैसे विषय शामिल हैं।