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प्रधानमंत्री मोदी का नया कार्यालय 'सेवा तीर्थ' कैबिनेट बैठकों का केंद्र बना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया कार्यालय 'सेवा तीर्थ' आज से कैबिनेट बैठकों का नया केंद्र बन गया है। यहां पहली बैठक में मंत्रियों को गुड न्यूज साझा करने की परंपरा का पालन करना होगा, जिससे टीम में उत्साह और प्रेरणा बनी रहे। यह नया कार्यालय साउथ ब्लॉक से स्थानांतरित हुआ है और इससे कार्यप्रणाली में सुधार होगा। जानें इस नई शुरुआत के बारे में और कैसे यह आम लोगों से जुड़े निर्णयों को प्रभावित करेगा।
 

नई दिल्ली में 'सेवा तीर्थ' का उद्घाटन

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया कार्यालय 'सेवा तीर्थ' आज से कैबिनेट बैठकों का नया स्थान बन गया है। आज सुबह 11 बजे यहां केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक आयोजित की जाएगी। 13 फरवरी को साउथ ब्लॉक से स्थानांतरित होने के बाद यह पहली बैठक है। प्रधानमंत्री इन बैठकों को केवल निर्णय लेने तक सीमित नहीं रखते, बल्कि एक सकारात्मक माहौल बनाने के लिए विशेष परंपरा का पालन करते हैं। हर मंत्री को कोई अच्छी खबर साझा करनी होती है, जिससे टीम में उत्साह और प्रेरणा बनी रहती है.


सेवा तीर्थ में कैबिनेट सचिवालय का स्थानांतरण

सेवा तीर्थ में कैबिनेट सचिवालय भी पूरी तरह से स्थानांतरित हो चुका है, जो पहले राष्ट्रपति भवन परिसर में स्थित था। इससे कार्यप्रणाली में सुधार होगा। प्रधानमंत्री आवास भी इसी क्षेत्र में बन रहा है। नया संसद भवन, पीएमओ और मंत्रालय अब 1-2 किलोमीटर के दायरे में होंगे, जिससे वीवीआईपी मूवमेंट के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम में कमी आएगी.


साउथ ब्लॉक की यादें ताजा

साउथ ब्लॉक में अंतिम बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने पुरानी यादों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के बाद नेहरू की पहली चार कैबिनेट बैठकें राष्ट्रपति भवन में हुई थीं। देश के चार बड़े युद्धों की रणनीति भी इसी भवन के वॉर रूम में बनाई गई थी। मंत्रियों को ऐतिहासिक निर्णयों की याद दिलाकर उन्होंने भावुक माहौल तैयार किया.


गुड न्यूज साझा करने की परंपरा

प्रधानमंत्री कैबिनेट की साप्ताहिक बैठकों में केवल एजेंडे पर चर्चा नहीं करते। वे सप्ताह भर की महत्वपूर्ण घटनाओं पर फीडबैक और सुझाव भी लेते हैं। सबसे खास बात यह है कि हर मंत्री को कोई अच्छी खबर साझा करनी होती है। यह मंत्रालय की सफलता, जैसे घाटे वाले उपक्रम को लाभ में लाना, या व्यक्तिगत खुशी जैसे राम मोहन नायडू का पिता बनना हो सकती है। इससे मंत्रियों में प्रेरणा बढ़ती है.


प्रेरणा और सकारात्मकता का माहौल

यह परंपरा मंत्रियों को आम लोगों से जुड़े निर्णयों के लिए प्रोत्साहित करती है। बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों की सफलताएं अक्सर अच्छी खबरों के रूप में साझा की जाती हैं। अनौपचारिक चर्चा में यह हिस्सा जोड़ा जाता है। प्रधानमंत्री का मानना है कि सकारात्मक खबरें सुनकर पूरी टीम में जोश बना रहता है और बेहतर कार्य होता है.