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प्रधानमंत्री मोदी की यूएई के राष्ट्रपति से सुरक्षा पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहायन से फोन पर बातचीत की, जिसमें उन्होंने ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा की। मोदी ने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। यह वार्ता भारत और यूएई के बीच सुरक्षा और स्थिरता के मुद्दों पर मजबूत संबंधों को दर्शाती है।
 

मोदी और यूएई के राष्ट्रपति के बीच बातचीत

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहायन से फोन पर संवाद किया। इस बातचीत की शुरुआत ईद की शुभकामनाओं से हुई, लेकिन जल्दी ही यह सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव के मुद्दों पर केंद्रित हो गई। पीएम मोदी ने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि निर्दोष लोगों की जान जाना और नागरिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचाना अस्वीकार्य है। इस वार्ता के बाद, पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने अपने भाई मोहम्मद बिन जायद को ईद की शुभकामनाएं दीं और पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने यूएई पर हुए हमलों की भारत की कड़ी निंदा को दोहराया।


सुरक्षा और स्थिरता पर सहमति

मोदी ने नाह्यान के साथ बातचीत में कहा कि भारत यूएई पर हुए सभी हमलों की निंदा करता है, जिनमें लोगों की जान गई और आम संपत्ति को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा, 'हम इस बात पर सहमत हुए कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।' दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता की बहाली के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। यह दूसरी बार है जब मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति से बातचीत की है, खासकर अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद।


क्षेत्रीय तनाव और भारत का रुख

ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में कई खाड़ी देशों पर हमले किए हैं। इस संघर्ष के आरंभ होने के बाद से, पीएम मोदी ने सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, जॉर्डन, इजराइल और ईरान के नेताओं से भी बातचीत की है। दोनों नेताओं ने समुद्री मार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को महत्वपूर्ण माना, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति का केंद्र है। यदि यहां कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।


भारत और यूएई के संबंध

हालांकि हालात अब नियंत्रित हो गए हैं, लेकिन भारत का रुख स्पष्ट है। भारत न केवल स्थिति पर नजर रख रहा है, बल्कि अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ लगातार संवाद भी कर रहा है। यह बातचीत दर्शाती है कि भारत और यूएई के संबंध केवल आर्थिक नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा और स्थिरता के मुद्दों पर भी मजबूत हैं।