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प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान में यूरेनियम आपूर्ति पर ऐतिहासिक समझौता किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में एक महत्वपूर्ण यूरेनियम आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह डील भारत के न्यूक्लियर विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत 2047 तक 100 गीगावाट की न्यूक्लियर क्षमता हासिल करना चाहता है। इस समझौते के तहत उज्बेकिस्तान भारत को लंबे समय तक यूरेनियम प्रदान करेगा। पीएम मोदी ने इस अवसर पर एक भगवा किताब उठाकर भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों की सराहना की। जानें इस डील के पीछे की कहानी और इसके महत्व के बारे में।
 

ताशकंद में मोदी का महत्वपूर्ण दौरा

उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण क्षण में भगवा किताब उठाई, जो कि उज्बेकिस्तान द्वारा उन्हें प्रस्तुत की गई थी। इस किताब के रंग ने कई लोगों का ध्यान खींचा। पीएम मोदी वर्तमान में उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के दौरे पर हैं, जहां किर्गिस्तान में एसईओ समिट का आयोजन हो रहा है। इस समिट में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान सहित 10 देशों के नेता शामिल हो रहे हैं।


किर्गिस्तान में एसईओ समिट में भाग लेने से पहले, पीएम मोदी ने उज्बेकिस्तान में एक महत्वपूर्ण समझौता किया। उन्होंने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति मिर्व के साथ बातचीत के दौरान इस किताब को उठाया और कहा कि इसमें भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों के बारे में जो लिखा गया है, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस किताब में एक ऐसा तथ्य है, जिसे सुनकर भारत के दुश्मन परेशान हो जाएंगे.


यूरेनियम आपूर्ति पर ऐतिहासिक डील

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम की आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक समझौता हुआ है। यह डील आने वाले वर्षों तक जारी रहेगी, जिसके तहत उज्बेकिस्तान भारत को परमाणु ऊर्जा के लिए आवश्यक यूरेनियम प्रदान करेगा। यह वही ताशकंद है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय मृत्यु हुई थी। उस समय कई शक्तियां थीं, जो भारत को परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भर नहीं बनने देना चाहती थीं।


करीब 60 साल बाद, पीएम मोदी ने उसी ताशकंद में एक ऐतिहासिक डील पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत को अपने न्यूक्लियर विस्तार के लिए यूरेनियम की आवश्यकता है, क्योंकि वह 2047 तक 100 गीगावाट की न्यूक्लियर क्षमता हासिल करना चाहता है। वर्तमान में भारत का घरेलू यूरेनियम उत्पादन उसकी जरूरत का केवल 30% ही पूरा करता है। ऐसे में, एक विश्वसनीय विदेशी सप्लायर की आवश्यकता थी, और अब उज्बेकिस्तान ने भारत के साथ यह डील की है।