प्रियंका गांधी का जन्मदिन: क्या लौटेंगी उत्तर प्रदेश की राजनीति में?
प्रियंका गांधी का जन्मदिन और कांग्रेस की गतिविधियाँ
12 जनवरी को प्रियंका गांधी वाड्रा का जन्मदिन मनाया गया। हालांकि, कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं ने इसे सोनिया और राहुल गांधी के जन्मदिन की तरह नहीं मनाया। फिर भी, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के नेताओं में उत्साह देखने को मिला। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने प्रियंका का जन्मदिन मनाया और कई राजनीतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। इसके साथ ही, कांग्रेस ने अगले तीन महीनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में अपने कार्यकर्ताओं और जनता के साथ संपर्क बढ़ाने का अभियान शुरू किया।
यह ध्यान देने योग्य है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय को प्रियंका का करीबी माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश अध्यक्षों में कई बदलाव हुए हैं, लेकिन अजय राय को बनाए रखा गया है। प्रियंका के जन्मदिन के बहाने हुई राजनीतिक गतिविधियों के बाद चर्चा शुरू हो गई है कि क्या प्रियंका उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिर से सक्रिय होंगी।
प्रियंका की राजनीतिक सक्रियता का सवाल
यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि प्रियंका की उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सक्रियता काफी कम हो गई है। पहले जब सोनिया गांधी रायबरेली और राहुल अमेठी के सांसद थे, तब प्रियंका इन क्षेत्रों का काम देखती थीं, जिससे उनका राज्य की राजनीति से जुड़ाव बना रहता था। लेकिन अब राहुल रायबरेली के सांसद हैं और अमेठी का कार्यभार किशोरी लाल शर्मा संभाल रहे हैं।
जब प्रियंका सक्रिय राजनीति में आईं, तो उन्हें केरल की वायनाड सीट मिली। जानकारों का कहना है कि वे अमेठी में स्मृति ईरानी के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन कांग्रेस ने स्मृति को एक कार्यकर्ता के हाथों हरवा कर राहुल की हार का बदला लिया। उल्लेखनीय है कि प्रियंका उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव रह चुकी हैं, लेकिन पिछले तीन साल से वे बिना किसी प्रभार के महासचिव हैं। इसीलिए, उम्मीद की जा रही है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना दिया जाए, जिससे कांग्रेस अधिक मजबूती से चुनाव लड़ सके। हालांकि, 2019 और 2022 में भी उन्होंने चुनाव की कमान संभाली थी, लेकिन प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा।