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प्रियंका गांधी ने संसद में उठाए गंभीर सवाल, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर जताई चिंता

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने हाल ही में संसद में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने एक घायल छात्रा की मां के दर्द को साझा करते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से पूछा कि एक निर्दोष बच्ची का दमन करने की क्या आवश्यकता थी। प्रियंका ने यह भी कहा कि यह सदन सांसदों की जागीर नहीं है, बल्कि देश की संपत्ति है। उनके बयान ने पूरे देश में चर्चा को जन्म दिया है। जानें और क्या कहा प्रियंका गांधी ने।
 

संसद में प्रियंका गांधी का बयान

संसद सत्र: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने लोकसभा में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हाल ही में वे दिल्ली के एक अस्पताल में गई थीं, जहां उन्होंने पुलिस की लाठीचार्ज से घायल एक छात्रा से मुलाकात की। उस बच्ची की मां ने कांपते हुए उनसे कहा, 'सुबह से यहां कई लोग आ रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं। वे भी आए, जिन्होंने मेरी बेटी को इस हाल में पहुंचाया। यह सब किसलिए? मेरी बेटी की बलि चढ़ गई है, लेकिन मैं उसके लिए लड़ूंगी।'


उस मां की आवाज आज भी मेरे दिल में गूंज रही है। इसलिए मैं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से पूछना चाहती हूं कि एक निर्दोष बच्ची का दमन करने की क्या आवश्यकता थी? लड़कियों को अपमानित करना और उनके कपड़े फाड़ना क्यों जरूरी था? छात्रों पर आंसू गैस, पैलेट गन और AK-47 चलाने का आदेश किसने दिया? क्या ये बच्चे आतंकवादी हैं? गृह मंत्री अमित शाह और पीएम मोदी को इस सवाल का जवाब देना होगा, जो आज पूरे देश में पूछा जा रहा है।


उन्होंने आगे कहा, छात्रों पर आंसू गैस छोड़ने और उन पर लाठियां बरसाने की क्या आवश्यकता थी? क्या जरूरत थी युवा लड़कियों को अपमानित करने की? क्या देश के युवाओं पर पैलेट गन और AK-47 चलाने की आवश्यकता थी? ये सवाल केवल कांग्रेस पार्टी नहीं, बल्कि पूरा देश पूछ रहा है। सरकार को यह बताना होगा कि वह युवाओं से क्यों डरती है और उनकी आवाज को दबाने का अधिकार किसने दिया?


प्रियंका गांधी ने कहा, यह सदन सांसदों की जागीर नहीं है, बल्कि यह देश की संपत्ति है। हम नागरिकों के सेवक और उनके प्रतिनिधि हैं। देश का संविधान हमारे लिए सर्वोपरि है और लोकतंत्र का संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी है। जनता हमसे जवाबदेही की उम्मीद करती है। हमें यहां भेजकर जनता चाहती है कि हम उनकी भलाई के लिए काम करें और अन्याय होने पर उन्हें न्याय दिलाएं।