फर्जी वीडियो में जयशंकर पर लगाए गए आरोपों का पीआईबी ने किया खंडन
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का सच
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो तेजी से फैल रहा है, जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से 'कॉकरोच जनता पार्टी' के हैंडलर्स को भारत को सौंपने का अनुरोध करते हुए दिखाया गया है। हालांकि, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) की फैक्ट चेक यूनिट ने इस वीडियो को पूरी तरह से 'फर्जी' और एआई-जनरेटेड बताया है।
पीआईबी ने स्पष्ट किया है कि इस वीडियो को डिजिटल रूप से संपादित किया गया है और विदेश मंत्री ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। फैक्ट चेक के अनुसार, मूल फुटेज एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का है, जिसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से बदला गया है। पीआईबी ने इस वीडियो के दावों का खंडन करते हुए कहा कि जयशंकर ने मूल वीडियो में ऐसा कोई बयान नहीं दिया।
वीडियो में गलत जानकारी का प्रचार
इस एआई द्वारा निर्मित वीडियो में जयशंकर को गलत तरीके से ट्रंप से मौजूदा निकम्मे लोगों की जनता पार्टी को सत्ता सौंपने का अनुरोध करते हुए दिखाया गया है। उन्हें ईरान और पाकिस्तान के एजेंट के रूप में भी दर्शाया गया है। इस मनगढ़ंत वीडियो में विदेश मंत्री को यह कहते हुए दिखाया गया है कि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि अमेरिका अभिजीत दिबके जैसे व्यक्तियों को शरण देगा।
वीडियो में जयशंकर को यह कहते हुए दिखाया गया है कि भारत अमेरिका और इजरायल के प्रति वफादार रहा है, जबकि अमेरिकी धरती पर कॉकरोच जनता पार्टी की मेज़बानी जारी है।
पीआईबी का स्पष्ट संदेश
जयशंकर को इस मनगढ़ंत वीडियो में यह कहते हुए दिखाया गया है कि जब वे मार्को रुबियो का स्वागत कर रहे हैं, तो उन्हें एक निवेदन करना है। उन्होंने कहा कि कुछ गैर-सरकारी संगठन भारत विरोधी आंदोलनों के लिए अमेरिका को एक मंच के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
पीआईबी ने इस वीडियो को लेकर चेतावनी दी है कि यह पूरी तरह से गलत है और इसे केवल प्रचार के लिए बनाया गया है।