फारूक अब्दुल्ला के विवादास्पद बयान पर भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया
फारूक अब्दुल्ला का बयान और भाजपा की प्रतिक्रिया
बारामूला में एक कार्यक्रम के दौरान, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नैशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि भारत का पड़ोसी देश वैश्विक स्तर पर कश्मीर मुद्दे को जीवित रखकर घाटी के निवासियों की रक्षा कर रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जम्मू-कश्मीर के लोग दिल्ली से क्या उम्मीद कर सकते हैं। बिना पाकिस्तान का नाम लिए, अब्दुल्ला ने कहा कि हमारा पड़ोसी देश लगातार भारत के खिलाफ खड़ा है, और नई दिल्ली आज अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण चुप है। उन्होंने कहा कि यह देश हर जगह यह बता रहा है कि कश्मीर का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है, और यह हमारी रक्षा कर रहा है, क्योंकि भारत के इरादे अच्छे नहीं हैं। अब्दुल्ला ने चेतावनी दी कि यदि लोगों में हिम्मत नहीं है, तो उनका अस्तित्व मिट जाएगा और कोई उन्हें याद नहीं रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर के लोग देश के दुश्मन नहीं हैं और मौजूदा शासकों से सुधार की अपील की।
इस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता अल्ताफ ठाकुर ने अब्दुल्ला के बयानों को देशद्रोही करार दिया। ठाकुर ने कहा कि ऐसे बयानों के लिए अब्दुल्ला के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान की शपथ लेने वाले नेता को अपने ही देश के इरादों पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। इस तरह के बयानों से पाकिस्तान के नैरेटिव को राजनीतिक वैधता मिलती है।
आज 26 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के दिन के रूप में मनाया जाता है। विलय दिवस से दो दिन पहले अब्दुल्ला का यह बयान उनके परिवार के दोगलेपन को दर्शाता है। फारूक अब्दुल्ला, जो शेख अब्दुल्ला के पदचिन्हों पर चल रहे हैं, अभी भी जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के अतीत को याद कर रहे हैं। उनका बयान न केवल उनकी नियत को दर्शाता है, बल्कि नैशनल कॉन्फ्रेंस की नीति को भी उजागर करता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ बयान दिया था, जिसका भारत ने विरोध किया था। अब्दुल्ला के बयानों के कारण घाटी में अलगाववादियों का उत्साह बढ़ता है, और युवा गुमराह हो जाते हैं। यह चिंता का विषय है।
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक।