बंदरों की सेहत पर खतरा: धार्मिक स्थलों पर मानव खाद्य पदार्थों का प्रभाव
बंदरों के लिए खतरा बनते मानव खाद्य पदार्थ
नई दिल्ली: धार्मिक स्थलों पर बंदरों को मिठाई, लड्डू, बिस्कुट और अन्य प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ देना एक सामान्य प्रथा बन गई है। लोग इसे दया और सेवा का प्रतीक मानते हैं, लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत बंदरों की सेहत के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रही है। हाल ही में जयपुर के प्रसिद्ध गलताजी मंदिर में बड़ी संख्या में बंदरों में त्वचा संबंधी बीमारियों के मामले सामने आए हैं।
त्वचा रोग का बढ़ता प्रकोप
विशेषज्ञों के अनुसार, कई बंदर हाइपरकेराटोसिस नामक त्वचा रोग से ग्रसित पाए गए हैं। इस बीमारी में त्वचा मोटी और सूखी हो जाती है, जिससे बाल झड़ने, घाव बनने और कभी-कभी खून निकलने की समस्या होती है। यह स्थिति बढ़ने पर बंदरों को चलने, कूदने और पेड़ों पर चढ़ने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
समस्या का मूल कारण
वरिष्ठ वन्यजीव पशु चिकित्सक के अनुसार, इस समस्या का मुख्य कारण बंदरों के प्राकृतिक आहार में बदलाव है। मंदिरों और पर्यटन स्थलों पर लोग उन्हें लगातार मिठाई, लड्डू और अन्य मानव खाद्य पदार्थ देते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों का लंबे समय तक सेवन करने से एलर्जी, त्वचा संबंधी रोग और पोषण असंतुलन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
वन विभाग की पहल
वन विभाग ने प्रभावित बंदरों के उपचार के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। बीमार बंदरों को पकड़कर जयपुर चिड़ियाघर में उपचार के लिए भेजा जा रहा है। इसके साथ ही, लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि वे बंदरों को प्रोसेस्ड और मीठे खाद्य पदार्थ न दें।
प्राकृतिक आहार का महत्व
विशेषज्ञों का कहना है कि बंदरों का प्राकृतिक आहार फल, पत्तियां, फूल, बीज और जड़ वाली सब्जियां हैं। यदि उन्हें उनके प्राकृतिक वातावरण में रहने दिया जाए और प्राकृतिक आहार मिले, तो वे अधिक स्वस्थ रह सकते हैं। मानव खाद्य पदार्थ उनके पाचन तंत्र और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
विशेषज्ञों की अपील
विशेषज्ञों ने बताया कि बंदरों के व्यवहार को लेकर एक दिलचस्प तथ्य यह है कि लोग मानते हैं कि बंदर केवल फ्रूटी के बदले सामान लौटाते हैं। लेकिन वास्तव में, यदि बंदर को कोई भी खाने की वस्तु दिखाई दे, तो वह हाथ में पकड़ी दूसरी चीज छोड़कर भोजन लेने की कोशिश करता है। यह उनके स्वाभाविक व्यवहार का हिस्सा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों की अपील है कि लोग बंदरों की मदद करने के लिए उन्हें मानव खाद्य पदार्थ देने के बजाय उनके प्राकृतिक भोजन और आवास को सुरक्षित रखने में सहयोग करें। यही उनके स्वास्थ्य और संरक्षण के लिए सबसे अच्छा तरीका है।