बांग्लादेश और चीन का तीस्ता नदी प्रबंधन पर समझौता: भारत के लिए चिंता का विषय
बांग्लादेश-चीन समझौता और भारत की चिंताएँ
भारत के लिए यह एक गंभीर चेतावनी हो सकती है, क्योंकि बांग्लादेश की पूर्व सरकार ने भारत के चिकन नेक को प्रभावित करने का सपना देखा था। मोहम्मद यूनुस द्वारा भेजे गए भड़काऊ विचारों के चलते, अब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीख रहमान ने चीन के साथ तीस्ता प्रोजेक्ट पर एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह समझौता बांग्लादेश और चीन के बीच तीस्ता नदी के प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने के लिए हुआ है।
बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस के अनुसार, यह समझौता तब हुआ जब चीन के जल संसाधन मंत्री ली गोइंग ने बांग्लादेश के पीएम रहमान से बीजिंग में मुलाकात की। रहमान ने अपनी पहली विदेशी यात्रा के लिए मलेशिया का चयन किया था और 22 जून को चीन के डालियान पहुंचे। वहां उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भाग लिया और फिर बीजिंग पहुंचे।
रिपोर्टों के अनुसार, रहमान ने बाढ़ के जोखिम को कम करने और जल संसाधनों के प्रबंधन में सुधार के लिए चीन से सहयोग मांगा। उन्होंने बांग्लादेश में नदी खुदाई कार्यक्रम पर जोर दिया और चीन के अनुभव से लाभ उठाने की इच्छा व्यक्त की।
रहमान ने तीस्ता प्रोजेक्ट में तकनीकी सहायता की भी मांग की, जिस पर चीनी मंत्री ने सहयोग का आश्वासन दिया। 2005 में ढाका और बीजिंग के बीच हुए एमओयू का उल्लेख करते हुए, ली ने कहा कि दोनों देशों के बीच जल संसाधन प्रबंधन में द्विपक्षीय सहयोग अनुसंधान आधारित है।
तीस्ता प्रोजेक्ट भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक संवेदनशील मुद्दा है। रहमान की सरकार ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के बाद सत्ता संभाली है, जिसके दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों में गिरावट आई थी। बीएसएस की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने जब बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील उर रहमान ने बीजिंग का दौरा किया, तो रहमान सरकार ने तीस्ता नदी के जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट के लिए चीन से औपचारिक समर्थन मांगा।