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बांदा में कोडीन कफ सिरप तस्करी रैकेट का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

बांदा में यूपी एसटीएफ और पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय कोडीन कफ सिरप तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में 30,000 अवैध कफ सिरप की शीशियां बरामद की गई हैं, जिनकी कीमत तीन करोड़ रुपये है। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। जांच में पता चला है कि इस तस्करी को वैधता देने के लिए फर्जी मेडिकल लाइसेंस का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस की टीमें मुख्य आरोपी की तलाश में जुटी हैं।
 

बांदा में तस्करी का खुलासा

बांदा। उत्तर प्रदेश की एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निकट एक बड़े अंतरराज्यीय कोडीन कफ सिरप तस्करी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने 30,000 अवैध कफ सिरप की शीशियां बरामद की हैं, जिनकी कुल कीमत तीन करोड़ रुपये है। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता उर्फ किशन अभी भी फरार है।


काले कारोबार का कानूनी ढांचा

पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि इस अवैध व्यापार को वैधता देने के लिए मेडिकल लाइसेंस का सहारा लिया जा रहा था। प्रियांशु गुप्ता के नाम पर 'श्याम मेडिकल एजेंसी' और गिरफ्तार आरोपी रोहित पांडेय के पिता के नाम पर 'श्रीराम मेडिकल एजेंसी' का लाइसेंस रजिस्टर्ड है। ड्रग विभाग ने इन मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी कर दवाओं के नमूने सील कर दिए हैं और प्रियांशु को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।


फर्जी दस्तावेजों का खेल

सूत्रों के अनुसार, यह सिंडिकेट दिल्ली के द्वारका स्थित 'गणेश फार्मा' से बड़ी मात्रा में कफ सिरप खरीदता था। इस खेप को वैध दिखाने के लिए हमीरपुर की एक बंद पड़ी 'ओम मेडिकल एजेंसी' के नाम पर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे। पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वे इस सिरप को मेडिकल स्टोरों पर बेचने के बजाय, इसके रैपर बदलकर नशीले पदार्थों के रूप में ऊंचे दामों पर बेचते थे। यह खेप बांदा, अतर्रा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में सप्लाई की जानी थी।


गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई

पुलिस ने प्रवीण उर्फ लकी गुप्ता, रोहित पांडेय, धीरेंद्र और शेखर को गिरफ्तार कर 14 दिनों की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। पूछताछ में यह पता चला है कि यह गिरोह पहले भी दो बार ऐसी बड़ी खेप लाकर लगभग 6 करोड़ रुपये का माल बाजार में खपा चुका है। घटना के बाद से मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता अपना मोबाइल फोन बंद कर फरार है। पुलिस की तीन टीमें दिल्ली, हमीरपुर और मध्य प्रदेश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही प्रियांशु की गिरफ्तारी के साथ इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों को भी बेनकाब किया जाएगा।