बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद
धीरेंद्र शास्त्री का विवादास्पद बयान
धीरेंद्र शास्त्री का बयान: बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र शास्त्री के एक बयान ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने दुर्गा पूजा के अवसर पर मांसाहारी भोजन से परहेज करने की सलाह दी थी। इस पर बीजेपी और टीएमसी के नेताओं ने विरोध जताया, यह कहते हुए कि बंगाल की खान-पान की परंपरा अलग है।
अग्निमित्रा पॉल का बयान
राजनीति से दूर रहने की अपील: पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि अन्य राज्यों की पूजा परंपराओं को बंगाल से नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने बताया कि कई राज्यों में नवरात्रि के दौरान लोग शाकाहारी होते हैं, लेकिन बंगाल में यह परंपरा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल के लोग पूजा के चार दिनों में बाहर जाकर खाने के लिए पैसे बचाते हैं। उनका कहना था कि कोई भी यह तय नहीं कर सकता कि बंगाल के लोग क्या खाएंगे और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
कुणाल घोष की प्रतिक्रिया
सरकार से माफी की मांग: टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने भी धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां बंगाली समुदाय का अपमान करती हैं और इसके लिए सरकार को माफी मांगनी चाहिए। इससे पहले, पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी इस बयान पर सवाल उठाया था, यह कहते हुए कि कोई बाहरी व्यक्ति बंगाल के लोगों के खान-पान का निर्णय नहीं ले सकता। इस प्रकार, बीजेपी और टीएमसी दोनों ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताई है, जिससे यह राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
धीरेंद्र शास्त्री का मूल बयान
क्या कहा था धीरेंद्र शास्त्री ने? हाल ही में, धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा से संबंधित एक टिप्पणी में कहा था कि जो लोग धार्मिक होने का दावा करते हैं, उन्हें पूजा पंडालों के पीछे मांसाहारी भोजन नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने ऐसे व्यक्तियों को धार्मिक नहीं, बल्कि पाखंडी करार दिया। इसके साथ ही, उन्होंने बंगालियों से दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन से बचने की अपील की थी। उनके इस बयान के बाद बंगाल में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। मंत्री अग्निमित्रा पॉल और अन्य नेताओं ने बंगाल की परंपराओं का हवाला देते हुए इस अपील पर आपत्ति जताई है।