बाबा रामदेव का ओवैसी पर बयान: यूपी चुनाव में राजनीतिक चर्चा तेज
राजनीतिक बयानबाजी में नया मोड़
राजनीति: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच राजनीतिक बयानबाजी में तेजी आई है। संभल के बबराला में आयोजित प्रांतीय आर्य महासम्मेलन में योगगुरु बाबा रामदेव ने AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बारे में एक ऐसा बयान दिया है, जो राजनीतिक चर्चाओं को बढ़ा सकता है। रामदेव ने कहा कि ओवैसी उत्तर प्रदेश के लिए 'उत्तम' हैं, क्योंकि उनके चुनावी मैदान में आने से कुछ वर्गों के वोट बंट सकते हैं, जिससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लाभ हो सकता है।
बाबा रामदेव से ओवैसी के उस बयान पर सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर अखिलेश यादव की सरकार नहीं बनती है, तो 'अब्दुल की सरकार' बनेगी। इस पर रामदेव ने वोटों के बंटवारे का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ को लाभ मिलने की संभावना व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'सीएम योगी आदित्यनाथ का चरित्र निर्माण में बहुत बड़ा योगदान है। देश में अच्छी आत्माओं का राज रहना चाहिए, यही धर्म युद्ध है।'
आज बाबा रामदेव ने इस बात की पुष्टि कर दी कि ओवैसी भाजपा की ही B टीम हैं।
जितने भी मुस्लिम भाई हैं जो ओवैसी के झांसे में आने वाले हैं वो सतर्क हो जाएं ये आपको बरगला कर आपका वोट बर्बाद कर देगा।
क्योंकि ये वोटकटवा बनकर ही उत्तर प्रदेश आया है और उसका सीधा फायदा भाजपा को होगा इसलिए ऐसे लोगों से सावधान रहें।
वो आपको धर्म और कट्टरता के नाम पर भड़का सकते हैं लेकिन आपको भाईचारे पर टिके रहना है और हर जिले की प्रत्येक विधानसभा में अखिलेश यादव जी को मजबूत करना है।
— MANISH YADAV लालू (@ManishPDA) October 27, 2026
असदुद्दीन ओवैसी लगातार मुस्लिम युवाओं से अपील कर रहे हैं कि वे अपनी राजनीतिक नेतृत्व क्षमता को विकसित करें और पारंपरिक राजनीतिक परिवारों पर निर्भर न रहें। उनका कहना है कि युवाओं को विधायक और सांसद बनकर अपने समुदाय और वंचित वर्गों के मुद्दों को उठाना चाहिए।
हालांकि, AIMIM की चुनावी ताकत उत्तर प्रदेश में सीमित रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी को कुल पड़े वोटों का लगभग 0.43% वोट शेयर मिला था। विपक्षी दलों के कुछ नेता AIMIM पर भाजपा विरोधी वोटों को बांटने का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि ओवैसी इन आरोपों को खारिज करते हैं।
बाबा रामदेव के बयान ने एक बार फिर वोटों के बंटवारे और विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति पर बहस को जन्म दिया है। हालांकि, चुनाव में किस पार्टी को कितना लाभ होगा, यह मतदाताओं के रुख, उम्मीदवारों और गठबंधनों समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।