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बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पीएम मोदी से पहली मुलाकात: कैबिनेट विस्तार की संभावना

बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहली बार मुलाकात की। इस मुलाकात में कैबिनेट विस्तार और राज्य के विकास पर चर्चा हुई। 24 अप्रैल को विधानसभा में विश्वास मत पेश करने की तैयारी है। जानें इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और क्या चुनौतियाँ सामने हैं।
 

नई दिल्ली में सम्राट चौधरी की पीएम मोदी से मुलाकात


नई दिल्ली: बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की। यह उनकी मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के बाद पहली यात्रा थी। इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


कैबिनेट विस्तार पर चर्चा की संभावना

सम्राट चौधरी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलने की योजना बना रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार पर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बैठकों के बाद कैबिनेट गठन की प्रक्रिया में तेजी आएगी।




कैबिनेट की स्थिति

वर्तमान में बिहार में केवल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दो उपमुख्यमंत्री ही शपथ ले चुके हैं। जनता दल (यूनाइटेड) से बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री बने हैं। भाजपा की ओर से अभी तक किसी को मंत्री नहीं बनाया गया है। बिहार में कुल 33 मंत्रियों की व्यवस्था है, लेकिन नई सरकार अभी पूरी तरह से गठित नहीं हुई है।


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कई विभाग अपने पास रखे हुए हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों में बाधा आ रही है। ऐसे में कैबिनेट विस्तार नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।


विशेष सत्र में विश्वास मत

बिहार विधानसभा का विशेष सत्र 24 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सदन में विश्वास मत प्रस्ताव पेश करेंगे और अपनी सरकार का बहुमत साबित करेंगे। यह पहला अवसर है जब बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बना है।


एनडीए सरकार में पहले नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और भाजपा से उपमुख्यमंत्री होते थे। अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है।


विकास और शासन पर ध्यान

मुलाकात के दौरान समृद्ध बिहार और राज्य के विकास पर चर्चा हुई। सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता का संदेश भी दिया है। दिल्ली की इन बैठकों के बाद मंत्रिमंडल विस्तार जल्दी हो सकता है, जिससे शासन व्यवस्था को नई गति मिलेगी।


बिहार की नई सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना है। कैबिनेट का पूरा गठन होने के बाद ही प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से चल पाएंगे।