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बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश का अनोखा रिकॉर्ड: बिना सदन के सदस्य बने मंत्री

बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश ने एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है, वे दो बार मंत्री बने लेकिन कभी भी किसी सदन के सदस्य नहीं रहे। इस लेख में जानें कैसे उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बनाया और दीपक प्रकाश की स्थिति कैसे बदलती रही। क्या वे फिर से मंत्री बन पाएंगे? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
 

दीपक प्रकाश का अनोखा मंत्री पद


बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश ने एक अनोखा रिकॉर्ड स्थापित किया है। वे दो बार मंत्री बने, लेकिन दोनों बार वे किसी सदन के सदस्य नहीं रहे। नवंबर 2025 में एनडीए सरकार के गठन के समय, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को मंत्री बना दिया, जबकि उनकी पार्टी के चार विधायक जीते थे। यह उम्मीद की जा रही थी कि उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा को मंत्री बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।


उस समय कहा गया था कि मंगल पांडेय विधानसभा चुनाव जीतने के बाद विधान परिषद की एक सीट खाली करेंगे, जिस पर दीपक प्रकाश को भेजा जाएगा। लेकिन भाजपा ने उस सीट को राष्ट्रीय लोक मोर्चा के लिए नहीं छोड़ा।


दीपक प्रकाश बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री बने रहे, इसी बीच राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ। नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल को इस्तीफा दिया और सम्राट चौधरी ने उनकी जगह ली। नीतीश के इस्तीफे के साथ उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने भी इस्तीफा दिया। इस प्रकार, दीपक प्रकाश लगभग पांच महीने तक मंत्री रहे।


इस दौरान भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेज दिया और कहा गया कि दीपक प्रकाश अब मंत्री नहीं बनेंगे। लेकिन 7 मई को सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल में दीपक प्रकाश को फिर से मंत्री बना दिया गया। इस बार कहा गया कि विधानसभा सदस्यों द्वारा चुने जाने वाले नौ विधान पार्षदों में से एक सीट दीपक प्रकाश को मिलेगी। लेकिन उन नौ उम्मीदवारों में उनका नाम नहीं था।


हालांकि, दीपक प्रकाश अब भी 7 नवंबर तक मंत्री रह सकते हैं, लेकिन तब तक कोई वैकेंसी नहीं आने वाली है, इसलिए उन्हें इस्तीफा देना होगा। उनके इस अनोखे रिकॉर्ड का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है।