बिहार में एनडीए की चुनौतियाँ: विधान परिषद चुनावों की तैयारी
बिहार में एनडीए की स्थिति
बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद से एनडीए की स्थिति में खटास आ गई है। पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 202 सीटों के साथ शानदार जीत हासिल की थी। लेकिन इसके बाद भोजपुर शाहाबाद की विधान परिषद सीट पर हुए उपचुनाव में सत्तारूढ़ जदयू के उम्मीदवार को राजद ने हराया। इस हार के पीछे भाजपा की सहयोग की कमी बताई गई। इसके बाद पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा का उम्मीदवार हार गया, जो कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की सीट है। अब भाजपा को राज्य के चार स्नात्तक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में विधान परिषद चुनावों में बड़ी जीत की आवश्यकता है, लेकिन हर सीट पर समीकरण जटिल हैं।
जदयू में आंतरिक संघर्ष
नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू में भी घमासान मचा हुआ है। पटना की स्नात्को सीट से लगातार तीन बार जीतने वाले नीरज कुमार इस बार भी चुनाव लड़ेंगे, लेकिन पार्टी के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने उन्हें हराने की घोषणा की है। उल्लेखनीय है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने राजद की टिकट पर मोकामा सीट से चुनाव लड़ा था, जबकि नीरज कुमार जदयू की टिकट पर उसी सीट से चुनावी मैदान में थे। नीलम देवी ने जीत हासिल की, जिसके बाद से अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच संबंध बिगड़ गए हैं। चुनाव से पहले अनंत सिंह के ऐलान ने पार्टी में हलचल पैदा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और नीतीश कुमार के करीबी श्रवण कुमार ने दोनों नेताओं को पार्टी कार्यालय में बुलाकर समझौता कराने का प्रयास किया है। यह समझौता संभवतः केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा।