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बिहार में धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून की मांग

बिहार में धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग उठी है। विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने इस मुद्दे पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी ऐसे कानून की आवश्यकता पर जोर दिया। विधायकों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना में बदलाव आया है, जिससे कानूनी हस्तक्षेप की आवश्यकता है। मंत्री ने बताया कि इस समय सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है।
 

धर्मांतरण पर सख्त कानून की आवश्यकता

बिहार में 'धर्मांतरण' के खिलाफ कठोर कानून बनाने की मांग उठी है। इस मुद्दे पर विधानसभा में सत्तारूढ़ दल के कई सदस्यों ने बजट सत्र के अंतिम दिन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत किया।


सत्ताधारी गठबंधन के 18 विधायकों, जिनमें मैथिली ठाकुर, मिथिलेश तिवारी, वीरेंद्र कुमार, जनक सिंह, संजय कुमार सिंह, जीवेश कुमार, तार किशोर प्रसाद और बैद्यनाथ प्रसाद शामिल हैं, ने इस विषय को उठाया। उन्होंने अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी 'धर्मांतरण' के खिलाफ कानून बनाने की मांग की।


विधायकों ने बताया कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून लागू हैं। इन कानूनों में धोखाधड़ी से धर्मांतरण, बाल विवाह या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के मामलों में 1 से 10 वर्ष या कुछ मामलों में 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।


सत्तापक्ष के विधायकों ने यह भी कहा कि बिहार के कुछ क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना में बदलाव आया है, जिसे देखते हुए कानूनी हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उन्होंने सीमावर्ती जिलों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा है।


भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा, "उत्तर प्रदेश में सख्त कानून हैं और बिहार में भी ऐसा ही कानून बनना चाहिए। अकेले बक्सर में 1,000 दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन किया है। इसलिए, इस धर्मांतरण विरोधी कानून की जरूरत है। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।"


कुछ विधायकों ने बिहार में जनसंख्या वृद्धि और चर्चों की संख्या में इजाफे का हवाला दिया। इसके साथ ही आरोप लगाया कि लालच देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। कुछ सदस्यों ने धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण के लाभों पर भी सवाल उठाए और अपनी दलीलों में संवैधानिक नियमों का उल्लेख किया।


पर्यटन और कला एवं संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने विधानसभा में बताया कि बिहार सरकार के पास धर्म परिवर्तन से संबंधित कानून लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्री ने कहा कि इस समय इस विषय पर कोई कानून बनाने का प्रस्ताव नहीं है।


विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है और आवश्यकता पड़ने पर सरकार मामले की समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर आगे कोई चर्चा नहीं होगी।