बिहार में भाजपा का एजेंडा: नीतीश कुमार की चुप्पी पर सवाल
बिहार की राजनीतिक स्थिति
बिहार में नीतीश कुमार भले ही मुख्यमंत्री हैं और जनता दल यू गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन राज्य में भाजपा का एजेंडा प्रमुखता से चल रहा है। जनता दल यू के पास ऐसा कोई नेता नहीं है जो इस स्थिति का विरोध कर सके। इस समय बिहार में ऐसी बातें हो रही हैं जो पहले कभी नहीं हुईं। भाजपा के नेता अब वो बातें कहने लगे हैं, जो पहले कहने की हिम्मत नहीं रखते थे। यह स्पष्ट है कि भाजपा के नेता अब सरकार को अपनी मानने लगे हैं और उन्हें यह भी पता है कि नीतीश कुमार को राज्य में हो रही घटनाओं का कोई ज्ञान नहीं है। यह नीतीश के करीबी नेताओं और मुख्यमंत्री आवास में बने सपोर्ट सिस्टम की कमजोरी को दर्शाता है, जो किसी भी सवाल का सामना नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि बिहार के बंटवारे की चर्चा भी हो रही है, लेकिन जनता दल यू की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया दौरे के दौरान सीमांचल में कुछ जिलों को अलग करके नए राज्य बनाने की बात की गई।
खुले में मांस और मछली की बिक्री पर प्रतिबंध
हाल ही में बिहार के उप मुख्यमंत्री और भूमि विकास एवं राजस्व मंत्री विजय सिन्हा ने घोषणा की कि राज्य में खुले में मांस और मछली की बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। यह बयान अचानक नहीं आया है, बल्कि भाजपा यह जानने की कोशिश कर रही है कि जनता दल यू इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है। यदि नीतीश कुमार अपने सही मन में होते, तो ऐसी बातें नहीं होतीं। बिहार देश के उन राज्यों में से एक है जहां मांसाहार की खपत सबसे अधिक है। केवल पश्चिम बंगाल, केरल और जम्मू कश्मीर जैसे कुछ राज्य ही बिहार से आगे हैं। बिहार की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या मांसाहार करती है, इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं। हालांकि, भाजपा के एक नेता ने इस पर नियंत्रण लगाने का ऐलान किया है।
गौहत्या पर पाबंदी का प्रस्ताव
उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने यह भी कहा कि बिहार सरकार गौहत्या पर पाबंदी लगाने के लिए कानून बनाने पर विचार कर रही है। यह मुद्दा बिहार में कभी भी प्रमुख नहीं रहा है। नीतीश कुमार पिछले 21 वर्षों से मुख्यमंत्री हैं और इस दौरान उन्होंने कभी भी इस तरह के संवेदनशील मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं दी। सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में, नीतीश ने हमेशा स्थिति को नियंत्रण में रखा है। भाजपा के साथ रहते हुए भी उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लिए काम किया है और अपनी सरकार में हमेशा मुस्लिम मंत्रियों को शामिल किया है। लेकिन अब जब वे निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हैं, भाजपा अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगी हुई है। जनता दल यू के नेता अपने स्वार्थ में चुप हैं।