बिहार विधान परिषद चुनाव: नीतीश कुमार की सीट पर उपचुनाव और 9 अन्य सीटों का खेल
बिहार विधान परिषद की सीटों पर चुनावी हलचल
बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया आज शुरू हो रही है। इनमें से नौ सीटों पर सामान्य चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव होगा, जो नीतीश कुमार के राज्य सभा जाने के कारण खाली हुई है। इस उपचुनाव में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी उम्मीदवार बन सकते हैं। वर्तमान में निशांत बिहार के स्वास्थ्य मंत्री हैं और यदि वे 2023 में विधानसभा चुनाव में भाग लेना चाहते हैं, तो उन्हें नीतीश की सीट पर चुनाव लड़ाया जा सकता है। अन्यथा, उन्हें किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ाने की योजना बनाई जा सकती है।
नीतीश की सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया अलग होगी। विधानसभा में एनडीए का बहुमत होने के कारण यह सीट सुरक्षित मानी जा रही है। इस वर्ष चार जेडीयू, दो बीजेपी, एक आरजेडी और एक कांग्रेस की सीटें खाली हो रही हैं, जिनका कार्यकाल 28 जून तक समाप्त हो जाएगा।
बीजेपी के सम्राट चौधरी, संजय मयूख, जेडीयू के श्री भगवान सिंह कुशवाहा, गुलाम गौस, भीष्ण सहनी, कुमुद वर्मा, राजद के सुनील कुमार सिंह, मोहम्मद फारुक और कांग्रेस के समीर कुमार सिंह शामिल हैं।
9 सीटों पर चुनावी मुकाबला
नीतीश कुमार की सीट पर उपचुनाव के साथ-साथ 9 अन्य सीटों पर चुनावी मुकाबला होगा। विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं, इसलिए चुनावी प्रक्रिया को इसी आधार पर समझा जाएगा। 243 सीटों के लिए 9 सीटों का चुनाव होने पर, जीत के लिए आवश्यक वोटों की संख्या भी इसी आधार पर तय होगी।
यदि 243 विधायक वोट डालते हैं, तो जीत के लिए एक उम्मीदवार को 2431 वोट की आवश्यकता होगी। इसका मतलब है कि 25 विधायकों के समर्थन से एक सीट जीती जा सकती है।
जेडीयू का चुनावी रणनीति
विधान सभा में बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी-आर, हम रालोमो मिलाकर 202 सदस्य हैं। एनडीए के 200 विधायकों की पहली वरीयता के वोट से 8 सीटें जीतने की संभावना है। विपक्ष में आरजेडी के 25, कांग्रेस के 6, सीपीआई-माले के 2, सीपीएम और आईआईपी के 1-1 विधायक हैं।
विपक्ष में कुल 41 विधायक हैं, जिससे एक सीट जीतने की संभावना है। यदि पहली वरीयता के मत से सभी 9 सीटों का परिणाम तय नहीं होता है, तो जिन उम्मीदवारों को कोटा का वोट मिलेगा, उन्हें विजयी घोषित किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में दूसरी वरीयता के मत को जोड़कर परिणाम निकाला जाएगा। कुल मिलाकर, बिहार विधान सभा के समीकरण बताते हैं कि यदि 10वां उम्मीदवार नहीं उतारा गया, तो 8 सीटें एनडीए और 1 सीट महागठबंधन जीत सकता है।