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बिहार विधान परिषद चुनाव में नेताओं की अनुपस्थिति: एक विडंबना

बिहार विधान परिषद के हालिया चुनाव ने कई विडंबनाओं को उजागर किया है, जिसमें प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति शामिल है। मतदान में भाग नहीं लेने वाले नेताओं की शैक्षणिक योग्यताएं भी सवालों के घेरे में हैं। जानें इस चुनाव की अनोखी स्थिति और इसके पीछे के कारण।
 

बिहार विधान परिषद चुनाव की अनोखी स्थिति


बिहार विधान परिषद की छह सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ, जो कई विडंबनाओं से भरा रहा। मतदाताओं की संख्या, उम्मीदवारों की गुणवत्ता और मतदान प्रतिशत पर सवाल उठे। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि बिहार के प्रमुख नेता या तो मतदाता नहीं थे या उन्होंने वोट नहीं डाला। यह सोचने वाली बात है कि बिहार के सभी बड़े नेता पटना में रहते हैं, फिर भी पटना के शिक्षक और स्नातक क्षेत्रों के चुनाव में कोई भी बड़ा नेता वोट नहीं डाल सका।


पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लालू प्रसाद, दोनों पटना के निवासी हैं, लेकिन उन्होंने मतदान नहीं किया। राबड़ी देवी, पूर्व मुख्यमंत्री, मतदाता बनने की योग्यताएं नहीं रखतीं क्योंकि वे स्नातक नहीं हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी पटना में रहते हैं, लेकिन वे भी स्नातक नहीं हैं, इसलिए मतदाता बनने के योग्य नहीं हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इस श्रेणी में आते हैं।


बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी केवल नौवीं कक्षा पास हैं, जिससे वे भी मतदाता बनने की योग्यताएं नहीं रखते। जनता दल यू के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को पहले इंजीनियर माना जाता था, लेकिन विधान परिषद के लिए नामांकन के समय पता चला कि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। इस प्रकार, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, और अन्य प्रमुख नेता या तो मतदाता बनने के योग्य नहीं थे या उन्होंने वोट नहीं दिया।