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ब्रजेश पाठक का चिकित्सकों से हिंदी में दवाओं के नाम लिखने का आग्रह

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों से अनुरोध किया है कि वे मरीजों के परामर्श-पर्चे पर दवाओं के नाम हिंदी में लिखें। उनका मानना है कि इससे मरीजों को दवाओं की पहचान में मदद मिलेगी और स्वास्थ्य प्रणाली में उनका विश्वास बढ़ेगा। पाठक ने स्थानीय भाषाओं में संवाद करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिससे मरीज अपनी समस्याओं को बेहतर समझ सकें। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं का उपयोग देश की भाषाई पहचान को मजबूत करता है।
 

चिकित्सकों के लिए उपमुख्यमंत्री का पत्र

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश के डॉक्टरों से अनुरोध किया है कि वे मरीजों के परामर्श-पर्चे पर दवाओं के नाम हिंदी या देवनागरी लिपि में लिखें। उनका मानना है कि इससे मरीजों को यह समझने में आसानी होगी कि उन्हें कौन सी दवाएं दी जा रही हैं, और इससे स्वास्थ्य प्रणाली में उनका विश्वास भी बढ़ेगा। डिप्टी सीएम ने चिकित्सकों को पत्र भेजकर कहा कि मरीजों की सुविधा और उनके विश्वास को ध्यान में रखते हुए दवाओं के नाम हिंदी में लिखने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने चिकित्सा संवाद को सरल और आम लोगों की समझ के अनुरूप बनाने पर जोर दिया।


"राष्ट्र नायकों की अभिलाषा
चले देश में देशज भाषा"

मेरे द्वारा सभी प्रिय चिकित्सक बन्धुओं से आग्रह किया गया है कि दवाओं एवं जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखें ताकि मरीज को पता रहे कि वह कौन सी दवा खा रहे हैं। मैं निजी तौर पर उन दवाओं को प्राथमिकता दूंगा जिनके नाम… pic.twitter.com/s5YAU16qI6

— Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) September 25, 2026


ब्रजेश पाठक ने कहा कि लोकतंत्र को लोकभाषा और जनभाषा के माध्यम से और अधिक मजबूत किया जा सकता है। यदि चिकित्सक मरीजों से उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में संवाद करें, तो मरीज अपनी समस्याओं और चिकित्सा सलाह को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। उन्होंने भोजपुरी, अवधी और ब्रजभाषा जैसी भाषाओं में संवाद करने की आवश्यकता पर बल दिया।


उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी के अधिक उपयोग का संकल्प लिया जा सकता है। राष्ट्रनायकों और महापुरुषों के विचारों से प्रेरणा लेकर जनसामान्य से जुड़ी व्यवस्थाओं में देशज भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।


विदेशों में हिंदी संवाद का उदाहरण

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विदेशों में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी के माध्यम से संवाद करते हैं। इससे देश की भाषाई पहचान को मजबूती मिलती है। उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि मरीजों की सुविधा के लिए चिकित्सा संबंधी संवाद को अधिक सरल और स्थानीय भाषा में बनाया जाए। उन्होंने कहा कि ‘देश में देशज भाषा के भाव’ को आगे बढ़ाते हुए चिकित्सक इस पहल को जनसेवा का हिस्सा बनाएं।