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ब्रिक्स इंडिया समिट 2026: विदेश मंत्री जयशंकर ने साझा की महत्वपूर्ण बातें

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिक्स इंडिया समिट 2026 के सफल समापन की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस समिट में 32 प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए, जिसमें कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति रही। जयशंकर ने भारत की एकजुटता और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इस समिट ने नेताओं को खुली बातचीत का अवसर प्रदान किया और विकासशील देशों के हितों को प्राथमिकता दी।
 

ब्रिक्स समिट की सफलता पर विदेश मंत्री की टिप्पणी

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को ब्रिक्स इंडिया समिट 2026 के सफल समापन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत की "मजबूत एकजुटता" को प्रदर्शित किया और यह दर्शाया कि एक बंटी हुई दुनिया में भी आम सहमति स्थापित की जा सकती है। मीडिया से बातचीत करते हुए जयशंकर ने बताया कि इस समिट में 32 प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए, जिनमें 11 सदस्य देश, 10 सहयोगी देश, चार क्षेत्रीय संगठन और सात अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने बताया कि अधिकांश देशों का प्रतिनिधित्व उच्चतम स्तर पर किया गया, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, इथियोपियाई प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।


भारत की एकजुटता और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा

जयशंकर ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मोदी के नेतृत्व में भारत ने लोगों को एक साथ लाने की क्षमता दिखाई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों की भागीदारी पर भी जोर दिया। इस शिखर सम्मेलन ने नेताओं को "खुली और सहज बातचीत" करने का अवसर प्रदान किया। विदेश मंत्री ने कहा कि यह समिट एक "बंटी हुई दुनिया" में आयोजित हुआ, जिसमें बड़े संघर्ष और गहरे मतभेद थे, लेकिन भारत ने कुछ जटिल मुद्दों पर आम सहमति बनाने में सफलता प्राप्त की। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया के संघर्ष का उल्लेख किया।


ब्रिक्स नेताओं की सहमति और एजेंडा

जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स नेताओं ने शांति, सुरक्षा, स्थिरता और दीर्घकालिक समझ की आवश्यकता पर सहमति जताई। इसके साथ ही, वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह के साथ नागरिकों और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। विदेश मंत्री ने बताया कि शिखर सम्मेलन का एजेंडा अर्थव्यवस्था, विकास और तकनीक पर केंद्रित रहा, जिसमें 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) के हितों का समर्थन करने पर विशेष जोर दिया गया।


आतंकवाद पर ब्रिक्स की स्पष्ट नीति

जयशंकर ने समिट के दो मुख्य सत्रों का उल्लेख किया, जो सुधार और मजबूती पर केंद्रित थे। उन्होंने आतंकवाद पर बनी आम सहमति का भी जिक्र किया और कहा कि ब्रिक्स ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद के किसी भी रूप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में 22 अप्रैल, 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद के प्रति "ज़ीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाने की बात की।