ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2023: दिल्ली में वैश्विक नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक
दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन
नई दिल्ली: वर्तमान में दिल्ली वैश्विक कूटनीति का केंद्र बन गई है। भारत की मेज़बानी में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता एकत्रित हुए हैं। इस वर्ष भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन की थीम 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास' रखी गई है।
प्रधानमंत्री मोदी की द्विपक्षीय मुलाकातें
महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएँ
सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएँ की हैं। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की गई। इसके अलावा, पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में चल रहे संघर्षों पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री ने कहा कि संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।
शी जिनपिंग का भारत दौरा
सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दिल्ली आगमन इस सम्मेलन की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटना है। सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग का स्वागत भारत की सांस्कृतिक झलक के साथ किया गया। मोदी और जिनपिंग के बीच संभावित बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर है, और यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ईरान और बहरीन के नेताओं की उपस्थिति
ईरान के राष्ट्रपति का सम्मेलन में शामिल होना
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी इस सम्मेलन में शामिल हुए हैं। मोदी और पेजेशकियन के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति और क्षेत्रीय शांति पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने संघर्षों के समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
बहरीन के विदेश मंत्री का महत्व
बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल जायनी का दिल्ली आगमन भारत-खाड़ी संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। उनकी उपस्थिति से भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक शांति और सुरक्षा पर चर्चा
ब्रिक्स देशों की चिंताएँ
सम्मेलन के दौरान वैश्विक शांति और सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा की गई। ब्रिक्स देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों पर चिंता व्यक्त की और संयम, संवाद, और कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया। सदस्य देशों ने एक संयुक्त घोषणा को भी मंजूरी दी, जिसमें एकतरफा सैन्य कार्रवाई और वैश्विक व्यापार पर चिंता व्यक्त की गई।
वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती
संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के साथ बैठक में सुरक्षा परिषद में सुधार, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
भारत की बढ़ती भूमिका
दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन का महत्व
दिल्ली में चल रहा ब्रिक्स सम्मेलन केवल राष्ट्राध्यक्षों की बैठक नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका का एक बड़ा मंच बन चुका है। भारत संतुलित कूटनीति के माध्यम से विभिन्न देशों को एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहा है। यह स्पष्ट है कि मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद और सहयोग का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए।