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ब्रिक्स सम्मेलन 2023: चीन का भारत को समर्थन, शी जिनपिंग की संभावित यात्रा

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित यात्रा और चीन का भारत को समर्थन चर्चा का विषय है। इस सम्मेलन में वैश्विक सप्लाई चेन, लोकल करेंसी में व्यापार, और टेक्नोलॉजी पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेज़बानी में होने वाला यह सम्मेलन ब्रिक्स के 20 साल पूरे होने का प्रतीक है। जानें इस सम्मेलन की खासियत और इसमें शामिल होने वाले नेताओं के बारे में।
 

ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारी

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की संभावना जताई जा रही है। उनके भारत आगमन से पहले, बीजिंग से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बयान जारी किया गया है, जिसमें चीन ने भारत की अध्यक्षता का समर्थन किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि चीन ब्रिक्स सहयोग को अत्यधिक महत्व देता है और भारत की मेज़बानी में होने वाले इस शिखर सम्मेलन का समर्थन करता है। यदि शी जिनपिंग इस सम्मेलन में भाग लेते हैं, तो यह उनकी 2019 के बाद पहली भारत यात्रा होगी। सीमा विवाद और पिछले वर्षों में दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद, जिनपिंग का भारत आना एक सकारात्मक संकेत है। 


द्विपक्षीय संबंधों पर बयान

द्विपक्षीय संबंधों पर बयान

यह बयान द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। हालांकि, जब चीनी प्रवक्ता से पूछा गया कि इस सम्मेलन में कौन शामिल होगा, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। लेकिन भारत की अध्यक्षता और ब्रिक्स एजेंडे को चीन का पूरा समर्थन प्राप्त है। भारत इस बार 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है, जिसका विषय 'बिल्डिंग ऑफ रेजिलियंस इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' है। प्रगति मैदान में विश्व नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसमें मजबूत वैश्विक सप्लाई चेन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा

महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा

वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों से निपटने के अलावा, लोकल करेंसी में व्यापार के मुद्दे पर भी चर्चा होगी। क्रॉस बॉर्डर पेमेंट इंटीग्रेशन और राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर बात की जाएगी। रूस ने भी बताया है कि वह ब्रिक्स देशों के साथ 90% व्यापार लोकल करेंसी में कर रहा है। तीसरी महत्वपूर्ण चर्चा टेक्नोलॉजी और एआई पर होगी, जिसमें डिजिटल ट्रेंड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने पर विचार किया जाएगा। 


संस्थागत सुधार और सम्मेलन का महत्व

संस्थाओं में सुधार चौथा महत्वपूर्ण मुद्दा हो सकता है, जिसमें न्यू डेवलपमेंट बैंक के विस्तार और वैश्विक वित्त एवं राजनीतिक संस्थाओं में आवश्यक सुधार पर चर्चा की जाएगी। इस सम्मेलन में सभी नेता मिलकर कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिसका साझा लक्ष्य सभी ब्रिक्स देशों की उन्नति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेज़बानी में होने वाला यह सम्मेलन खास है, क्योंकि इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भागीदारी की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा, दक्षिण अफ्रीका के सिरेला रामाफोसा, मिस्र के अब्देल फतेह अल-सिसी, इंडोनेशिया के प्रोबो सुबियानतो, ईरान के मशहूद पेजियान समेत 11 सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों के शीर्ष नेता भी शामिल होंगे। अटकलें हैं कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इसमें भाग ले सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इस महत्वपूर्ण इवेंट में मौजूद रहेंगे। यह सम्मेलन ब्रिक्स के 20 साल पूरे होने का प्रतीक भी है, जहां भारत वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को मजबूती से प्रस्तुत करेगा। भारत ने पहले भी 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की सफल अध्यक्षता की है।