ब्रिटेन का ईरान युद्ध में शामिल न होने का निर्णय, ट्रंप की नाराजगी
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया है। अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर पहले हमला किया, जिसके बाद ईरान ने अपने पड़ोसी दुश्मनों को निशाना बनाया। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों से सहायता की मांग की है। लेकिन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल न होने का अपना निर्णय स्पष्ट किया है।
कीर स्टार्मर का कड़ा निर्णय
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियानों में भाग नहीं लेगा। उनका स्पष्ट बयान था कि यह लड़ाई ब्रिटेन की नहीं है।
ब्रिटेन पर बढ़ता दबाव
यह निर्णय उस समय आया है जब नाटो के सहयोगी देशों ने ब्रिटेन पर इस युद्ध में शामिल होने का दबाव डाला था। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह देश की सेना को किसी भी आक्रामक अभियान में शामिल नहीं होने देंगे, जिससे राष्ट्रीय हितों को खतरा हो। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिटेन ने इराक युद्ध से महत्वपूर्ण सबक सीखा है और वह उन गलतियों को नहीं दोहराना चाहता।
सैन्य ठिकाने का सीमित उपयोग
हालांकि, स्टार्मर ने पूरी तरह से हाथ खींचने का निर्णय नहीं लिया है। ब्रिटेन ने अमेरिका को साइप्रस में स्थित अपने 'आरएएफ अक्रोतिरी' सैन्य ठिकाने का उपयोग करने की अनुमति दी है, लेकिन कुछ सख्त शर्तों के साथ। यह ठिकाना केवल रक्षात्मक कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि आसमान में आने वाले मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करना। हाल ही में, रॉयल एयर फोर्स ने खाड़ी क्षेत्र में ईरानी ड्रोन को नष्ट किया था।
ब्रिटेन और अमेरिका के रिश्तों में तनाव
ब्रिटेन के इस निर्णय से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नाराजगी स्पष्ट है। ट्रंप ने कहा कि ब्रिटेन द्वारा अपने सैन्य ठिकानों के असीमित उपयोग की अनुमति न देना, दोनों देशों के बीच के पुराने संबंधों में दरार का संकेत है।
सुरक्षा और अर्थव्यवस्था का ध्यान
इस निर्णय का ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ रहा है। स्टार्मर जानते हैं कि यदि ब्रिटेन इस युद्ध में गहराई से शामिल होता है, तो स्वेज नहर और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट आने से महंगाई और तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इस प्रकार, ब्रिटिश पीएम ने देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए सहयोगियों को एक स्पष्ट संदेश दिया है।