भवानीपुर में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक हलचल तेज
भवानीपुर की मतदाता सूची पर विवाद
पश्चिम बंगाल के भवानीपुर क्षेत्र में मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। यह वही सीट है जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विधायक हैं। हाल ही में खबर आई है कि यहां से और भी मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। विपक्ष इसे मुख्यमंत्री के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में देख रहा है, जबकि ममता बनर्जी खुद को पूरी तरह से आश्वस्त महसूस कर रही हैं.
न्यायिक जांच की प्रक्रिया
भवानीपुर की मतदाता सूची में जिन वोटरों के दस्तावेजों में 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' पाई गई है, उन्हें न्यायिक जांच के लिए भेजा गया है। इस प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद और नाम हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है.
संख्यात्मक आंकड़े
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 14,154 मामलों को न्यायिक जांच के लिए भेजा गया है। इससे पहले, अंतिम मतदाता सूची में 47,111 नाम पहले ही हटाए जा चुके हैं। यदि न्यायिक जांच के बाद और नाम हटते हैं, तो यह संख्या और बढ़ सकती है.
विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर विपक्ष ने मुख्यमंत्री को घेरना शुरू कर दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटना मुख्यमंत्री के लिए खतरे की घंटी है। उनका दावा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में अब वहां इतने वोटर नहीं बचे हैं जो ममता बनर्जी की जीत सुनिश्चित कर सकें.
ममता बनर्जी का आत्मविश्वास
ममता बनर्जी ने आत्मविश्वास के साथ कहा है कि वह भवानीपुर से चुनाव जीतेंगी, चाहे केवल एक ही वोटर क्यों न बचा हो। उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई असली और वैध मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए गए हैं.
साजिश का आरोप
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह सब एक साजिश के तहत किया गया है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी की भूमिका है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलकर यह कार्य किया है.