भाजपा और एनडीए में बढ़ती दरारें: बिहार और महाराष्ट्र में खींचतान
भाजपा और एनडीए में असंतोष
भारतीय जनता पार्टी और उसके नेतृत्व वाले एनडीए में स्थिति ठीक नहीं है। बिहार और महाराष्ट्र में सहयोगी दलों के बीच खींचतान चल रही है, जबकि उत्तर प्रदेश में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों के बीच अंदरूनी संघर्ष इतना बढ़ गया है कि अमित शाह को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने सभी नेताओं से कहा कि अपनी नाराजगी को गोमती में बहा दें। यह स्पष्ट है कि कई नेता किसी न किसी कारण से असंतुष्ट हैं और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस असंतोष को दूर करने की कोशिश कर रहा है।
विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव में भाजपा के अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आए। कई सीटों पर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अधिकृत उम्मीदवारों का विरोध किया। वाराणसी शिक्षक सीट पर प्रमोद मिश्रा के खिलाफ और वाराणसी स्नातक सीट पर केदारनाथ सिंह के पुनः चुनाव का विरोध हुआ। गोरखपुर में संजय त्रिपाठी को टिकट न देने की नाराजगी थी, जबकि लखनऊ में अवनीश सिंह पटेल को टिकट देने पर विवाद हुआ।
चुनाव परिणामों के बाद, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा को परिणामों पर आत्मचिंतन करना होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी को उन क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा, जहां उसे जीतना चाहिए था। हालांकि, यह विवाद केवल एमएलसी चुनाव से शुरू नहीं हुआ, बल्कि पहले से ही चल रहा था। भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि विनोद तावड़े ने पार्टी के सभी गुटों को एकजुट करने का प्रयास किया है, लेकिन वह सफल नहीं हो पाए।
भाजपा की सहयोगी पार्टियों के साथ खींचतान बिहार, यूपी और महाराष्ट्र में स्पष्ट है। उत्तर प्रदेश में ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और संजय निषाद की निषाद पार्टी भाजपा को चुनौती दे रही हैं। वहीं, महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनाव में एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भाजपा को एक सीट पर हराया। पुणे और छत्रपति संभाजीनगर सीटों पर भाजपा ने सफाई मांगी है। बिहार में भी भाजपा और जदयू के बीच तिरहुत स्नातक सीट को लेकर विवाद चल रहा है। जदयू के अभिषेक झा ने भाजपा पर भितरघात का आरोप लगाया है।