भाजपा और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं की मुलाकात पर उठे सवाल
भाजपा और सीपीसी की मुलाकात का रहस्य
कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों और भाजपा पर किए गए हमलों को नजरअंदाज करते हुए, यह जानना जरूरी है कि भाजपा के नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पदाधिकारी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के नेताओं से क्यों मिले। हाल ही में, सीपीसी के प्रतिनिधिमंडल के भारत दौरे से पहले भाजपा नेताओं की एक बैठक पार्टी मुख्यालय में हुई, जिसमें भाजपा के महासचिव अरुण सिंह भी शामिल थे। इसके बाद संघ के कार्यालय में दत्तात्रेय होसबाले के नेतृत्व में संघ का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला। इस समय जब भारत और चीन के रिश्ते तनावपूर्ण हैं, इस मुलाकात का क्या उद्देश्य हो सकता है?
यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, चीन ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया था। भारत के उप सेना प्रमुख राहुल सिंह ने कहा था कि भारतीय सेना चीन के खिलाफ लड़ाई में थी। इसके अलावा, चीन ने अरुणाचल प्रदेश के विवाद को बढ़ावा दिया है और शक्सगाम घाटी में निर्माण कार्य कर रहा है। ऐसे में, यदि कोई महत्वपूर्ण कारण नहीं है, तो यह मुलाकात संभव नहीं होती।
अब सवाल यह है कि वह महत्वपूर्ण कारण क्या हो सकता है? क्या भारत सरकार अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ युद्ध में चीन के प्रति अपनी नजदीकी दिखाकर कोई रणनीति बना रही है? क्या यह अमेरिका को यह संदेश देने का प्रयास है कि भाजपा ने न केवल सरकारी स्तर पर, बल्कि पार्टी स्तर पर भी चीन के साथ संबंध बढ़ाए हैं? यदि ऐसा है, तो यह एक गंभीर कूटनीतिक गलती हो सकती है। इसके साथ ही, यह भाजपा की घरेलू राजनीति में भी एक बड़ी चूक मानी जा सकती है। कुछ समय पहले तक, भाजपा कांग्रेस पर आरोप लगाती थी कि उनके नेता चीन के राजदूत से मिले थे या कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चीन गया था। लेकिन अब भाजपा और संघ ने खुद ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से मुलाकात को वैधता प्रदान की है। इसीलिए, सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थक सीपीसी नेताओं से मुलाकात की तस्वीरों को खराब ऑप्टिक्स बता रहे हैं। यह अच्छा है कि संघ ने मुलाकात की तस्वीरें साझा नहीं की।