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भाजपा का संसद में बहुमत बढ़ाने की रणनीति

भारतीय जनता पार्टी संसद में अपने बहुमत को बढ़ाने के लिए कई रणनीतियों का उपयोग कर रही है। सांसदों को अन्य दलों से तोड़कर भाजपा में शामिल करने से लेकर नए सहयोगियों को जोड़ने तक, पार्टी ने विभिन्न मॉडल अपनाए हैं। मिजोरम की जेडपीएम पार्टी ने एनडीए सरकार का समर्थन करने का निर्णय लिया है, जिससे भाजपा को संसद में और अधिक ताकत मिल रही है। जानें इस राजनीतिक खेल के पीछे की पूरी कहानी।
 

संसद में भाजपा की बढ़ती ताकत


मानसून सत्र से पहले, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसद में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए कई रणनीतियों पर काम कर रही है। एक तरीका यह है कि सांसदों को अन्य दलों से तोड़कर सीधे भाजपा में शामिल किया जाए, जैसा कि पंजाब और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के साथ हुआ।


दूसरी रणनीति में, भाजपा अपने बहुमत वाले राज्यों में विपक्ष के राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे को सुनिश्चित कर रही है, जैसा कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल में देखा गया। तीसरी रणनीति में, विपक्षी सांसदों को किसी सहयोगी पार्टी में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है, जैसा कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के सांसदों के साथ हुआ।


चौथी रणनीति में, विपक्षी सांसदों को किसी छोटी पार्टी में शामिल कर उसे गठबंधन में लाने का प्रयास किया जा रहा है, जैसा कि बंगाल में हुआ। पांचवी रणनीति के तहत, पार्टी को तोड़कर अलग गुट की मान्यता दिलाने का प्रयास किया जा रहा है, जैसा कि बंगाल विधानसभा में देखा गया।


इसके अतिरिक्त, भाजपा नए सहयोगियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा ने पूर्वोत्तर में अपने गठबंधन से बाहर रह गई पार्टियों को एनडीए में लाने की योजना बनाई है। मिजोरम की सत्तारूढ़ पार्टी, जो हमेशा एनडीए से बाहर रही है, अब एनडीए सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार है। हाल ही में राज्यसभा में चुने गए जेडपीएम के सांसद लालतलुआंगकिमा ने कहा है कि वे मुद्दों के आधार पर एनडीए सरकार का समर्थन करेंगे।


जेडपीएम ने यह तय किया है कि वह तटस्थ रहेगी लेकिन सरकार को मुद्दा आधारित समर्थन देगी। जेडपीएम के समर्थन से, अब दोनों सदनों में सरकार को एक अतिरिक्त सांसद का समर्थन प्राप्त हो गया है।