भाजपा की दुविधा: महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर विशेष सत्र की आवश्यकता
भाजपा की दुविधा
भाजपा एक कठिन स्थिति में है। पार्टी को यह तय करना है कि पहले महिला आरक्षण बिल में संशोधन और परिसीमन बिल को पास कराने के लिए विशेष सत्र बुलाए या मंत्रिपरिषद में बदलाव करे। संसद में दो तिहाई बहुमत की कमी के कारण महिला आरक्षण बिल में संशोधन करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। यदि मंत्रिपरिषद में फेरबदल किया जाता है, तो इससे बहुमत जुटाने की कोशिशों पर असर पड़ सकता है। इस समय, विशेष सत्र बुलाने की चर्चा तेज हो गई है, जिसमें परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को पास कराने की योजना है।
इसके अलावा, एक देश, एक चुनाव के लिए लाए गए 129वें संविधान संशोधन पर भी विचार चल रहा है। इस पर संयुक्त संसदीय समिति के प्रमुख पीपी चौधरी ने संकेत दिए हैं कि इसे 2029 के चुनावों में लागू किया जा सकता है। हालांकि, सरकार इस पर निर्णय लेने के लिए इंतजार कर रही है और विशेष सत्र की आवश्यकता नहीं है।
विशेष सत्र की संभावनाएं
अब सवाल यह है कि संसद का विशेष सत्र कब आयोजित होगा? ध्यान देने वाली बात यह है कि मानसून सत्र का समापन अभी तक नहीं हुआ है। संसद के दोनों सदन 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए थे, लेकिन अभी तक सत्रावसान नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि सरकार जब चाहे सत्र बुला सकती है, इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस की सरकारों ने भी पहले संसद का सत्रावसान नहीं किया था।
विशेष सत्र कब बुलाया जाएगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार दो तिहाई बहुमत जुटा पा रही है या नहीं। यदि डीएमके सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करती है, तो सरकार का आंकड़ा पूरा हो जाएगा। लेकिन, तमिलनाडु में सत्तारूढ़ टीवीके और कांग्रेस द्वारा पारित परिसीमन विरोधी प्रस्ताव के कारण डीएमके बैकफुट पर है।
हालांकि, कहा जा रहा है कि सितंबर में सरकार इस दिशा में कदम उठाने का प्रयास करेगी।
मंत्रिपरिषद में फेरबदल
सितंबर में मंत्रिपरिषद में फेरबदल की भी चर्चा है, लेकिन यह महिला आरक्षण बिल में संशोधन और परिसीमन बिल पास होने के बाद ही किया जाएगा। भाजपा ने सभी पार्टियों के सामने मंत्री पद का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, डीएमके का समर्थन मिलने पर भी वह सरकार में शायद ही शामिल हो।
इसके अलावा, ममता बनर्जी की पार्टी से अलग हुए सांसदों, उद्धव ठाकरे की पार्टी छोड़ने वाले सांसदों और शरद पवार की एनसीपी के नेताओं के सामने भी मंत्री पद का लालच है। भाजपा चाहती है कि आवश्यक विधेयक पास कराने के बाद ही मंत्रिपरिषद में फेरबदल हो, ताकि किसी भी नाराजगी का असर विधायी कार्य पर न पड़े।
यदि संसद का विशेष सत्र नहीं होता है, तो मंत्रिपरिषद का विस्तार टलता रहेगा। संभवतः यह कार्य नवरात्रों में, यानी अक्टूबर में किया जा सकता है। भाजपा के नेता सितंबर में कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम की उम्मीद कर रहे हैं।