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भाजपा की नई रणनीति: मजबूत नेताओं को मुख्यमंत्री बनाना

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मुख्यमंत्री चयन की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिसमें प्रभावशाली नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। बिहार में सम्राट चौधरी और पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाया गया है, जबकि असम में हिमंत बिस्वा सरमा का फिर से चयन होना तय है। यह बदलाव 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले झटके के बाद आया है, जब भाजपा को कई सीटों का नुकसान हुआ था। जानें इस नई रणनीति के पीछे के कारण और भाजपा की भविष्य की राजनीति पर इसके प्रभाव के बारे में।
 

भाजपा का नेतृत्व में बदलाव

भारतीय जनता पार्टी अब एक अलग तरीके से लोगों को आश्चर्यचकित कर रही है। पार्टी ने राज्यों में प्रभावशाली नेताओं को मुख्यमंत्री के पद पर नियुक्त करना शुरू कर दिया है। बिहार में सम्राट चौधरी और पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाया गया है। असम में हिमंत बिस्वा सरमा का फिर से मुख्यमंत्री बनना लगभग निश्चित है। पहले भाजपा के बारे में यह धारणा थी कि वह किसी भी व्यक्ति को मुख्यमंत्री बना सकती है। यह कहा जाने लगा था कि भाजपा नामों का चयन पर्ची से कर रही है। राजस्थान में भजनलाल शर्मा और मध्य प्रदेश में मोहन यादव को सीएम बनाए जाने के बाद यह धारणा और मजबूत हुई। ओडिशा में भी भाजपा ने दिग्गज नेताओं को छोड़कर मोहन चरण मांझी को चुना और छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय को कमान सौंपी। उत्तर भारत में इसकी शुरुआत हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाकर हुई थी।


मुख्यमंत्री चयन की प्रक्रिया

भाजपा के बारे में बनी इस धारणा के कारण जब बिहार में नया मुख्यमंत्री चुनने का समय आया, तो अधिकांश लोगों का मानना था कि कोई अप्रत्याशित नाम सामने आएगा। सम्राट चौधरी का नाम केवल इस आधार पर खारिज किया जा रहा था कि उनकी चर्चा बहुत हो रही है, इसलिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह उन्हें नहीं चुनेंगे। लेकिन अंततः उनके नाम पर मुहर लग गई। कोई आश्चर्यजनक नाम नहीं आया। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली और जब पहले मुख्यमंत्री का चयन हुआ, तो शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे था। हालांकि, कई लोगों का मानना था कि उनकी चर्चा के कारण वे नहीं बनेंगे। यह भी कहा गया कि भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला है, इसलिए पार्टी आरएसएस के किसी पुराने नेता को मौका देगी। लेकिन अमित शाह ने खुद शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया। अब असम में मुख्यमंत्री का चयन होना है, और यह तय है कि हिमंत बिस्वा सरमा ही फिर से सीएम बनेंगे।


भाजपा की रणनीति में बदलाव

भाजपा आलाकमान की रणनीति में यह बदलाव 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले झटके के कारण हुआ है। पिछले चुनाव में भाजपा को 63 सीटों का नुकसान हुआ था और वह अपने दम पर बहुमत नहीं हासिल कर पाई थी। इसके बाद, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद, दिल्ली के एक अपवाद को छोड़कर, भाजपा ने हर जगह ऐसे व्यक्तियों को मुख्यमंत्री बनाया, जिनका बनना निश्चित माना जा रहा था। महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस स्वाभाविक पसंद थे, इसलिए उन्हें चुना गया। हरियाणा में भाजपा ने नायब सिंह सैनी के नाम पर चुनाव लड़ा और उन्हें चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री बनाया गया। इसी तरह, बिहार में पार्टी ने स्वाभाविक पसंद माने जाने वाले सम्राट चौधरी को चुना। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी बने और असम में सरमा बनेंगे। इसका अर्थ है कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अपने मुख्यमंत्रियों की प्रदर्शन का आकलन किया है। पार्टी को यह समझ में आया है कि जनता के बीच लोकप्रिय और मजबूत सामाजिक आधार वाले नेता को मुख्यमंत्री बनाना आवश्यक है।