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भाजपा की नेतृत्व परिवर्तन में देरी: नितिन नबीन की टीम का गठन अभी बाकी

भारतीय जनता पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन के बाद नितिन नबीन की टीम का गठन अब तक नहीं हुआ है। पश्चिम बंगाल और असम में सरकारें सीमित मंत्रियों के साथ कार्य कर रही हैं, जिससे काम की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। भाजपा की इस स्थिति पर सवाल उठते हैं, खासकर जब कांग्रेस शासित राज्यों में इसी तरह की स्थिति पर मीडिया में चर्चा होती है। क्या भाजपा इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी? जानें पूरी कहानी में।
 

भाजपा की नेतृत्व में बदलाव की स्थिति


भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गतिविधियों में तेजी की कमी दिखाई दे रही है। जेपी नड्डा का कार्यकाल तीन साल से बढ़कर छह साल तक चला, जिसमें अंतिम तीन साल सेवा विस्तार के तहत गुजरे। अब, जब नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, तब भी उनकी टीम का गठन नहीं हुआ है। नबीन को 20 जनवरी को अध्यक्ष बनाया गया था, और एक महीने पहले वे कार्यकारी अध्यक्ष बने थे। लेकिन अब तक, चार महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी, उनकी टीम का गठन नहीं हो पाया है।


इसी तरह, पश्चिम बंगाल में भाजपा ने हाल ही में चुनाव जीता है, लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी केवल पांच मंत्रियों के साथ सरकार चला रहे हैं। मुख्यमंत्री अकेले 42 विभागों का प्रबंधन कर रहे हैं। असम में भी, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा चार मंत्रियों के साथ कार्य कर रहे हैं।


भाजपा को इस बात की चिंता नहीं है कि पश्चिम बंगाल में 40 और मंत्री नियुक्त करने हैं या असम में 16 और मंत्री बनाने हैं। यह स्थिति काम की गुणवत्ता पर भी असर डाल सकती है। यदि ऐसा किसी कांग्रेस शासित राज्य में होता, तो भाजपा इसे बड़ा मुद्दा बनाती। केरल में कांग्रेस को नेता चुनने में भाजपा की तुलना में दो दिन अधिक समय लगा था, लेकिन इस पर मीडिया में काफी चर्चा हुई।


केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की कोई संवैधानिक आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक आवश्यकता के अनुसार किया जाना है। इसलिए, इसमें समय लग रहा है।