भाजपा की पंजाब विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने की योजना
पंजाब चुनाव की तैयारी
पंजाब विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को पंजाब का दौरा किया, जिसमें चंडीगढ़ से जालंधर तक राजनीतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस दौरान, उन्होंने रविदास समाज के प्रमुख निरंजन दास से भी मुलाकात की, जिन्हें पिछले वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। पंजाब में दलितों की आबादी लगभग 33 प्रतिशत है, जिसमें रविदास समुदाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भाजपा इस बार इन समुदायों के वोटों को अपने पक्ष में करने की उम्मीद कर रही है। पंजाब में हिंदू आबादी लगभग 38 प्रतिशत है, और 55 सीटों पर हिंदू मतदाताओं का प्रभाव है। भाजपा इन सीटों पर ध्यान केंद्रित करके चुनाव में भाग लेने की योजना बना रही है। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों जाट सिख समुदाय से हैं, लेकिन भाजपा की राजनीति मुख्य रूप से हिंदू वोटों पर निर्भर करती है।
कांग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरे भी जाट सिख समुदाय से हैं। नई पार्टी 'वारिस पंजाब दे' का आधार भी इसी समुदाय पर है। जाट सिख समुदाय की आबादी लगभग 22 प्रतिशत है, और मालवा क्षेत्र की 69 सीटों पर उनका प्रभाव है। भाजपा को उम्मीद है कि यदि चार पार्टियों के बीच जाट सिख वोट बंटते हैं, तो 38 प्रतिशत हिंदू आबादी उसे सबसे बड़ी या दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बना सकती है। इसलिए, भाजपा अपने एजेंडे पर अकेले चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है।