भाजपा की मंडल प्रधानों की सूची पर उठे सवाल, दलित समुदाय की अनदेखी से बढ़ा रोष
दलित समुदाय की अनदेखी पर उठे सवाल
*दबी जुबान में कई वर्कर नाराज… न रविदास भाईचारे, न वाल्मीकि भाईचारे और न ही भगत बिरादरी को रखा गया नामों की अग्रिम पंक्ति में
*भाजपा दलित समुदाय से दूरी बनाना चाहती है: अरुण संदल
जालंधर (विकास शर्मा): जालंधर भाजपा शहरी ने मंगलवार को वेस्ट विधानसभा क्षेत्र और कैंट विधानसभा क्षेत्र में मंडल प्रधानों के नामों की घोषणा की। वेस्ट क्षेत्र में जारी सूची पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, सार्वजनिक रूप से विरोध नहीं हो रहा है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, इस सूची में दलित समुदाय के किसी नेता को प्रमुखता नहीं दी गई है। वेस्ट विधानसभा क्षेत्र एक आरक्षित सीट है और पूर्व सांसद सुशील रिंकू और पूर्व विधायक शीतल अंगुराल दोनों ही दलित समुदाय से हैं। ऐसे में, मंडल प्रधानों की सूची में दलित समाज को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए एक गंभीर संकेत हो सकता है। वेस्ट विधानसभा क्षेत्र की सूची में कुल 5 नाम शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन नामों में न तो रविदास भाईचारे का कोई प्रतिनिधि है, न वाल्मीकि भाईचारे का। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वेस्ट विधानसभा क्षेत्र में भगत बिरादरी का एक बड़ा वोट बैंक है, लेकिन मंडल प्रधानों की सूची में उन्हें भी प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। इससे भार्गव कैंप में अंदरखाते विरोध की आवाजें उठ सकती हैं। एक और बात यह सामने आई है कि प्रधानों के नामों की सूची में एक नेता की राय को अधिक महत्व दिया गया, जबकि अन्य के समर्थकों को सूची से बाहर रखा गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पार्टी के अंदर की राजनीति है, लेकिन आरक्षित सीट पर किसी दलित नेता को प्रमुखता न देना अनुचित है। भाजपा के विरोधी दल, जैसे आम आदमी पार्टी और कांग्रेस, इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर सकते हैं, क्योंकि आम आदमी पार्टी ने भगत बिरादरी से विधायक मोहिंदर भगत को कैबिनेट मंत्री बनाया है। अनुमान है कि वेस्ट विधानसभा क्षेत्र में 60 प्रतिशत से अधिक वोटर दलित समुदाय (रविदास भाईचारा, वाल्मीकि भाईचारा, भगत बिरादरी) से हैं, इसलिए उनका प्रतिनिधित्व मंडल की सूची में होना आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि मंडल प्रधानों की सूची में बस्ती गुजां से ऋषि बहल, बस्ती दानिशमंदा से मनीष बल, घास मंडी मंडल से अजय ठाकुर, माडल हाउस से सोनू चौहान और बस्ती पीरदाद से प्रदीप खुल्लर को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस रोष के चलते कबीर टाइगर फोर्स के अध्यक्ष अरुण संदल ने स्पष्ट कहा है कि भाजपा दलित समुदाय से दूर रहना चाहती है। भाजपा नहीं चाहती कि दलित समुदाय पार्टी में ऊंचे पदों पर पहुंचे, बल्कि उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है। दलितों का हमेशा से वोट बैंक के लिए उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन अब इस सोच को बदलना होगा। हालांकि, वेस्ट हल्का पूरी तरह से आरक्षित है, फिर भी इस तरह का भेदभाव करना दलित समाज का अपमान है। भाजपा को अपनी सोच और रणनीति में बदलाव लाना चाहिए और दलितों को उनके हक दिलाने के लिए पार्टी के ऊंचे पदों तक पहुंचाना चाहिए।