☰
×

भाजपा की रणनीति: उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव में सपा की चालों पर नजर

उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में भाजपा समाजवादी पार्टी की हर चाल पर नजर रख रही है। भाजपा को पता है कि अखिलेश यादव इस बार तीन उम्मीदवार उतारेंगे, जिससे स्थिति और भी जटिल हो सकती है। भाजपा की योजना है कि वह एक नौवां उम्मीदवार उतारकर सपा के वोटों को तोड़ सके। जानें कैसे भाजपा अपने विधायकों की टिकटों को लेकर चिंतित है और सपा की चुनौतियों का सामना कर रही है।
 

राज्यसभा चुनाव की तैयारी


उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के नजदीक आते ही भाजपा समाजवादी पार्टी की हर गतिविधि पर ध्यान दे रही है। पार्टी को यह जानकारी है कि अखिलेश यादव इस बार तीन उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे। पिछले चुनाव में उनका तीसरा उम्मीदवार हार गया था, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद की स्थिति में बदलाव आया है। भाजपा के कई विधायक इस बात से चिंतित हैं कि उनकी टिकटें कट सकती हैं, जिससे वे पाला बदलने पर विचार कर सकते हैं। सहयोगी दलों के विधायकों की स्थिति भी अस्थिर है। यदि अखिलेश किसी अगड़ी जाति या गैर यादव पिछड़ी जाति के उम्मीदवार को उतारते हैं, तो एनडीए के विधायकों में फूट पड़ने की संभावना है। इस स्थिति को रोकने के लिए भाजपा एक नौवां उम्मीदवार उतारने या किसी मजबूत निर्दलीय को समर्थन देने की योजना बना रही है।


भाजपा की सीटों की स्थिति

भाजपा के पास वर्तमान में 256 सीटें हैं, जबकि सहयोगियों के साथ मिलाकर यह संख्या 294 हो जाती है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की कुल सीटें 102 हैं, और रघुराज प्रताप की पार्टी के पास दो सीटें हैं। यह माना जा रहा है कि रघुराज प्रताप का वोट भाजपा के पक्ष में जाएगा। भाजपा को आठ सीटें जीतने के लिए 296 वोटों की आवश्यकता है, और इसके लिए पार्टी ने पुख्ता इंतजाम कर रखे हैं। हालांकि, यदि सहयोगी दलों या भाजपा के अपने वोट में कोई सेंध लगती है, तो यह समस्या उत्पन्न कर सकती है। इसलिए भाजपा की रणनीति है कि वह एक नौवां उम्मीदवार उतारकर सपा के कुछ वोट तोड़ सके। जानकारों का कहना है कि यदि सपा किसी मुस्लिम उम्मीदवार को दूसरा उम्मीदवार बनाती है, तो उसके कुछ विधायक टूट सकते हैं, जिन्हें भाजपा अपनी टिकट पर चुनाव लड़ाने का प्रयास कर सकती है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए यह मुश्किल लग रहा है कि सपा अपने 74 विधायकों को भी एकजुट रख सके।