भाजपा दक्षिण भारत में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में
भाजपा का विस्तार और दक्षिण भारत की चुनौतियाँ
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने देश के पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। कुछ राज्यों को छोड़कर, लगभग सभी जगह भाजपा या एनडीए की सरकारें हैं। खासकर पूर्वी भारत में, भाजपा ने पश्चिम बंगाल में भी अपनी पकड़ बना ली है। पश्चिम में, महाराष्ट्र में लगातार तीन बार जीतने के बाद भाजपा ने अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की जीत का सिलसिला जारी है। हालांकि, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को छोड़कर, उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में भाजपा का शासन है।
इसके बावजूद, दक्षिण भारत में भाजपा को संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। यहां के पांच राज्यों में से चार में कांग्रेस और उसके सहयोगियों की सरकार है, जबकि एक राज्य में टीडीपी की सरकार है, जिसमें भाजपा एक छोटी सहयोगी पार्टी है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि पार्टी दक्षिण भारत में अपने आधार को बढ़ाने के लिए नए गठबंधनों पर विचार कर रही है। हालांकि भाजपा की स्थिति वहां मजबूत नहीं है, लेकिन दक्षिण भारत के सभी राज्यों में उसका वोट बैंक बढ़ा है। आंध्र प्रदेश में भाजपा टीडीपी और जन सेना पार्टी के साथ है, जबकि कर्नाटक में जेडीएस के साथ तालमेल बना रही है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा तमिलनाडु और तेलंगाना में नए समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है। तेलंगाना में, भाजपा के चंद्रशेखर राव की पार्टी बीआरएस के साथ तालमेल कर सकती है, और तमिलनाडु में, एमके स्टालिन की डीएमके को एनडीए में शामिल किया जा सकता है। यदि भाजपा दक्षिण के प्रमुख पांच प्रादेशिक दलों को अपने साथ लाने में सफल होती है, तो वह कांग्रेस को एक मजबूत चुनौती दे सकती है।