भाजपा ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को 2027 चुनाव के लिए चेहरा घोषित किया
भाजपा की चुनावी रणनीति
इस वर्ष के विधानसभा चुनावों का आयोजन जारी है, और परिणाम चार मई को घोषित किए जाएंगे। लेकिन इससे पहले, भारतीय जनता पार्टी ने अगले वर्ष होने वाले चुनावों के लिए अपने चेहरों की घोषणा करना शुरू कर दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उत्तर प्रदेश के लिए योगी आदित्यनाथ को अपना चेहरा घोषित किया है। उन्होंने एक निजी टेलीविजन चैनल के साक्षात्कार में कहा कि 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भाजपा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लड़ेगी। इससे अब किसी भी प्रकार की बहस की गुंजाइश नहीं रह गई है। पहले से ही इस बात में कोई संदेह नहीं था। चुनाव में अब केवल 10 महीने बचे हैं, और ऐसे में योगी आदित्यनाथ जैसे मुख्यमंत्री को बदलना संभव नहीं है। हालांकि, कुछ लोग मानते हैं कि यदि पश्चिम बंगाल में भाजपा जीत जाती है, तो वह कुछ भी कर सकती है।
अन्य राज्यों में भाजपा की रणनीति
उत्तर प्रदेश के लिए चेहरा घोषित होने के बाद, यह सवाल उठता है कि क्या भाजपा अन्य राज्यों में भी अगले साल के चुनावों के लिए चेहरा घोषित करेगी। क्या उत्तर प्रदेश की तरह अन्य राज्यों में भी भाजपा मौजूदा मुख्यमंत्रियों के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री हैं। पार्टी ने पिछले चुनाव में उनके चेहरे पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, वे खुद चुनाव हार गए थे, फिर भी उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। इस बार उनके पक्ष में समान नागरिक संहिता कानून लागू करने का क्रेडिट है, लेकिन पांच साल से अधिक की एंटी इन्कम्बैंसी और अंदरूनी गुटबाजी भी है। इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या योगी की तरह उनका नाम घोषित किया जाएगा या चुपचाप चुनाव लड़ा जाएगा।
गोवा और मणिपुर की स्थिति
गोवा में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के चेहरे पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि प्रमोद सावंत ने अच्छा कार्य किया है और अगले वर्ष वे पार्टी को पूर्ण बहुमत से वापस ला सकते हैं। वहीं, मणिपुर की स्थिति जटिल है क्योंकि एन बीरेन सिंह को हटाकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। एक साल बाद वाई खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया। यदि खेमचंद सिंह को घोषित करके चुनाव लड़ा गया, तो भितरघात का खतरा हो सकता है। इसलिए कहा जा रहा है कि मणिपुर में भाजपा बिना चेहरा घोषित किए चुनाव लड़ेगी।
पंजाब और अन्य राज्यों की संभावनाएं
पंजाब में भाजपा का कुछ भी दांव पर नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने केवल दो सीटें जीती थीं और लोकसभा चुनाव में उसका खाता भी नहीं खुला। हालांकि, अब नए दांव खेले जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी में फूट हो गई है, और कहा जा रहा है कि उसके विधायक दल में भी टूट हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो भाजपा को नए अलायंस का मौका मिल सकता है और वह कोई नया चेहरा पेश कर सकती है। अगले वर्ष मार्च में उपरोक्त पांच राज्यों में चुनाव होंगे, और नवंबर में हिमाचल प्रदेश और गुजरात का चुनाव भी होना है। इन दोनों राज्यों में भाजपा बिना किसी चेहरा घोषित किए चुनाव लड़ेगी। गुजरात में भाजपा जीत को लेकर आश्वस्त है, जबकि हिमाचल में वह चेहरा घोषित नहीं करेगी, लेकिन यदि जीतती है, तो जेपी नड्डा को मुख्यमंत्री बना कर भेजा जा सकता है।