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भाजपा ने चुनाव आयोग का किया बचाव, कांग्रेस पर लगाए आरोप

भाजपा ने चुनाव आयोग का समर्थन करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस विवाद के बीच, भाजपा के प्रवक्ताओं ने तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। जानें इस राजनीतिक संघर्ष के पीछे की पूरी कहानी और क्या है एसआईआर का मुद्दा।
 

भाजपा का चुनाव आयोग के समर्थन में प्रदर्शन


नई दिल्ली। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और उसके मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग का समर्थन करने के लिए तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। भाजपा के प्रवक्ताओं ने छह घंटे के भीतर तीन बार मीडिया से बात की, जिसमें उन्होंने आयोग का बचाव करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाए।


सुबह 10 बजे संबित पात्रा ने पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस की, इसके बाद दोपहर एक बजे सुधांशु त्रिवेदी ने मीडिया से संवाद किया, और अंत में प्रदीप भंडारी ने भी चुनाव आयोग के समर्थन में अपनी बात रखी। भाजपा ने राहुल गांधी द्वारा फॉर्म छह में बदलाव के आरोपों का जवाब दिया। पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग ने फॉर्म छह में कोई बदलाव नहीं किया है।


पात्रा ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के लिए फॉर्म छह के साथ एक अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ा गया था। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को बिहार में एसआईआर को मान्यता दी थी और अतिरिक्त दस्तावेजी प्रक्रिया की आवश्यकता को स्वीकार किया था। हालांकि, 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उसने फॉर्म छह के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और पूछा कि यदि फॉर्म में बदलाव हुआ है तो यह किसने और किस अधिकार से किया। यह मुद्दा अब राहुल और भाजपा के बीच विवाद का केंद्र बन गया है।


राहुल गांधी ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म छह में ‘गैरकानूनी और एकतरफा’ बदलाव किया है, जिसका उपयोग भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। उल्लेखनीय है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत देशभर में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। भाजपा ने इस पर भी अपनी बात रखी और बताया कि लगभग तीन करोड़ नाम मृत मतदाताओं के हैं और करीब सात करोड़ नाम स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए लोगों के हैं।