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भाजपा नेताओं की पाकिस्तान यात्रा पर उठे सवाल

कांग्रेस नेताओं की पाकिस्तान यात्रा पर विवाद और भाजपा नेताओं की मुलाकातों पर उठते सवालों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। जब कांग्रेस के नेता पाकिस्तान के उच्चायोग में जाते हैं, तो उन्हें देशद्रोही करार दिया जाता है, जबकि भाजपा के नेताओं की मुलाकातों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं होती। क्या यह दोहरे मानदंडों का संकेत है? जानें इस मुद्दे पर और क्या है राय।
 

कांग्रेस नेताओं की पाकिस्तान यात्रा पर विवाद


यह एक दिलचस्प स्थिति है कि जब कांग्रेस का कोई सदस्य पाकिस्तान के उच्चायोग में जाकर वहां के उच्चायुक्त या किसी अन्य राजनयिक से मिलता है, तो यह एक बड़ा विवाद बन जाता है। भारतीय जनता पार्टी और अन्य राइटविंग विचारधारा के लेखक और पत्रकार इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हैं। ऐसे नेताओं को देशद्रोही करार दिया जाता है, और कांग्रेस की छवि को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया जाता है। इसके विपरीत, जब भाजपा के नेता पाकिस्तान के राजनेताओं, राजनयिकों और सैन्य अधिकारियों से मिलते हैं, तो कोई भी इस पर आपत्ति नहीं करता।


यह बहस इस बात पर नहीं है कि सरकार ट्रैक टू डिप्लोमेसी कर रही है या नहीं, बल्कि यह सवाल उठता है कि भाजपा के नेता और रिटायर अधिकारी पाकिस्तान के लोगों से मिलने के लिए क्यों आगे बढ़ रहे हैं। क्या उन्हें देशद्रोही नहीं माना जाएगा?


सरकार ने केवल यह कहा है कि श्रीलंका में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) के कार्यक्रम में भारतीय नेताओं और पूर्व अधिकारियों की पाकिस्तानी नेताओं से मुलाकात ट्रैक टू डिप्लोमेसी नहीं है। क्या इस बयान से मामला समाप्त हो गया? राम माधव भाजपा के प्रमुख नेताओं में से एक हैं, जो पहले पार्टी के महासचिव रह चुके हैं।


इसी प्रकार, एमएम नरवणे भारतीय थल सेना के पूर्व प्रमुख रहे हैं, और रुचि घनश्याम एक अनुभवी राजनयिक हैं, जो पाकिस्तान में भी रह चुकी हैं। इन लोगों ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारी सज्जाद हैदर खान से मुलाकात की। इस बैठक में पीपुल्स पार्टी की नेता शेरी रहमान और रिटायर मेयर जनरल इस्फंदियार अली खान पटौदी भी शामिल थे।


यह भी बताया गया है कि आईआईएसएस के माध्यम से भारत और पाकिस्तान के पूर्व अधिकारियों और नेताओं के बीच संवाद पहले से ही चल रहा है। लेकिन राम माधव, नरवणे या रुचि घनश्याम के पाकिस्तानियों से मिलने पर राइटविंग के किसी भी व्यक्ति को कोई आपत्ति नहीं है। आशा की जानी चाहिए कि भविष्य में अन्य पार्टियों के लोग भी पाकिस्तानियों से मिलेंगे, तो उस पर भी कोई विवाद नहीं होगा।